डॉ. कुणाल सिंह ने बताया कि गुल मंजन से डाइलेटेड कार्डियोमायोपैथी की समस्या तेजी से बढ़ रही है। यह हृदय की मांसपेशियों का एक तरह का रोग है। इसमें हृदय के आकार में असामान्य वृद्धि, मांसपेशियों की दीवारों की मोटाई, बड़े पैमाने पर मांसपेशियों का बढ़ना और सिकुड़न होता है। इससे हृदय की सिकुड़न और पंप करने की शक्ति कम हो जाती है। इसमें मरीज की मौत हो जाती है।
बिहार और पूर्वांचल के लोग ज्यादा इस्तेमाल कर रहे गुल मंजन
डॉ. कुणाल सिंह ने बताया कि यह समस्या केवल एक जिले की नहीं है। बल्कि, पूर्वांचल के लगभग हर जिलों की है। ओपीडी में गोरखपुर के अलावा महराजगंज, संतकबीरनगर, बस्ती, देवरिया, कुशीनगर, मऊ, आजमगढ़, बिहार प्रदेश के पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, बगहा, सिवान, छपरा जैसे जिलों के मरीज भी गुल मंजन का सेवन ज्यादा कर रहे हैं। गुल मंजन के साथ ये लोग किसी ने किसी रूप में तंबाकू का भी इस्तेमाल कर रहे हैं।