कालानमक धान की उपज को बढ़ाने, उसके प्रसंस्करण, पैकेजिंग और ब्रांडिंग के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे सिद्धार्थनगर का ओडीओपी घोषित किया है। सरकार 12 करोड़ रुपये की लागत से सीएफसी (कॉमन फैसिलिटी सेंटर ) भी बना रही है। दूसरी ओर केंद्र सरकार ने कालानमक धान को सिद्धार्थनगर के साथ ही बस्ती, गोरखपुर, महराजगंज, सिद्धार्थनगर और संतकबीरनगर का एक जिला एक उत्पाद घोषित किया है।
‘बुद्ध का महाप्रसाद’ प्रमुख बौद्ध देशों दक्षिण कोरिया, चीन, जापान, म्यांमार, कंबोडिया, मंगोलिया, वियतनाम, थाईलैंड, श्रीलंका, भूटान तक पहुंचाने में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा निर्यात प्रोत्साहन विभाग के अलावा अपर मुख्य सचिव डॉ. नवनीत सहगल भी लगे हैं। उनकी कोशिशों से कालानमक ऑनलाइन बिक्री के लिए उपलब्ध है। कालानमक सिद्धार्थनगर और गोरखपुर जिले से सिंगापुर और नेपाल को एक्सपोर्ट किया जा रहा है।
कालानमक चावल का गौतम बुद्ध से ऐतिहासिक जुड़ाव
कृषि वैज्ञानिक डॉ. रामचेत चौधरी के मुताबिक कालानमक धान सिद्धार्थनगर के बजहा गांव में गौतम बुद्ध के कालखंड से पैदा होता आ रहा। मान्यता है कि महात्मा बुद्ध ने हिरण्यवती नदी के तट पर इसी चावल की खीर ग्रहण कर उपवास तोड़ा था। खीर श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में दिया। भगवान बुद्ध ने कालानमक का दाना किसानों को देकर इसकी खेती करने की सलाह दी।
कालानमक का जिक्र चीनी यात्री फाह्यान के यात्रा वृत्तांत में भी मिलता है। यह चावल सुगंध, स्वाद और सेहत से भरपूर है। सिद्धार्थनगर का बर्डपुर ब्लॉक इसका गढ़ है। एक समय तक इसकी खेती का रकबा 10 हजार हेक्टेयर से भी कम रह गया था, लेकिन राज्य सरकार के प्रयासों से यह बढ़कर 50 हजार हेक्टेयर से अधिक हो गया है।