अपनी जरूरत और सामान गलत तरीके से खुद तक पहुंचाने की दलील के बाद एक तारीख तय हो गई और इसके बाद टीम वापस लौट आई। 24 फरवरी को बिहार से गाड़ियों के आने की सूचना मिली। 24 घंटे कड़ी मशक्कत कर टीम ने 25 तारीख की रात तक बस्ती, देवरिया और कुशीनगर से इन गाड़ियों को अपने कब्जे में लेकर सील किया। जांच में सामने आया कि कुछ गाड़ियों में रखे गए सामान का ईवे बिल ही नहीं था। जबकि, दूसरी गाड़ियों में ईवे बिल जो मिला वह राजस्थान और हरियाणा के पते का था।
जांच में पता चला कि इसमें करीब 125 करोड़ रुपये के लोहे का स्क्रैप रखा था, जो किसके पास जाना था? यह रिकार्ड में नहीं था। टीम ने सभी गाड़ियों को सीज कर कार्रवाई की। जांच अभी जारी है।
आठ गाड़ियां बस्ती-अयोध्या टोल पर पकड़ी गईं
अवैध तरीके से लोहे का स्क्रैप ला रहीं आठ गाड़ियां बिहार से गोरखपुर होते हुए अयोध्या टोल तक पहुंच गई थीं। टोल के पास गाड़ियां खड़ी थीं कि टीम मौके पर पहुंच कर उन्हें कब्जे में ले ली। इनसे सूचना मिली कि कुछ गाड़ियां अभी और बिहार से ही आने वाली हैं। सूचना के आधार पर कुशीनगर से गोरखपुर आने वाले रास्ते के टोल पर खड़ी 20 गाड़ियों को कब्जे में लेकर सील कर दिया गया।
जीएसटी सूत्रों ने बताया कि मंडल में कुल 232 लोहे के बड़े कारोबारी हैं। इनमें से पंजीकृत व्यापारियों के पास आने वाले लोहे के स्क्रैप की जांच की जा रही है। दो बड़े फर्मों पर जाकर जांच पूरी भी कर ली गई है। आने वाले कुछ दिनों में लोहे के कारोबारियों के यहां आए स्क्रैप का मिलान भी शुरू होगा।
ऐसे खपाते हैं स्क्रैप
जीएसटी के सूत्रों ने बताया कि लोहे के स्कैप से करोड़ों रुपये से अधिक का व्यापार होता है। दरअसल, लोहे की फैक्ट्रियों में अघोषित रूप से लोहे के कबाड़ की खरीद की जाती हैं। ऐसा इसलिए कि उससे बिना प्रपत्रों के सरिया, लोहे के एंगल, चादर व सरिया बनाने में प्रयोग किया जाने वाला इंगट तैयार किया जाता है। इसी इंगट को बिल्डरों को बाजार से सस्ते दर पर दे दिया जाता। अघोषित रूप से लोहे से होने वाले व्यापार की वजह और बड़े मुनाफे से ऐसा कारोबार किया जा रहा।
ग्रेड 2 एडिश्नल कमिश्नर देवमणि शर्मा ने कहा कि जीएसटी की एसआईबी ने एक साथ बड़ी कार्रवाई की है। इसमें एसआईबी की नौ टीमें लगी थीं। 24 से 48 घंटे लगातार इनपुट के आधार पर टीम ने जाल फैलाया। सफलता के रूप में अवैध कारोबार के लिए जा रहीं 28 बड़ी गाड़ियों को जब्त कर सीज किया गया है। इन गाड़ियों में सवा सौ करोड़ रुपये का माल भरा था।