चौरीचौरा की घटना के शहीदों के परिजनों को आजादी के 51 साल बाद पेंशन मिलनी शुरू हुई। चार फरवरी 1994 को चौरीचौरा के 96 शहीदों के आश्रितों को पेंशन देने का आदेश जारी हुआ। 228 शहीदों पर मुकदमा दर्ज हुआ था। लेकिन 96 शहीदों के परिवार ही पेंशन के हकदार बने। इसके लिए भी लगातार कोशिशें होती रहीं।
03 जून 1981 को तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी और सीएम यूपी वीपी सिंह को कामरेड गुरुप्रसाद त्रिपाठी ने आंदोलनकारियों को पेंशन दिलाने के लिए पत्र लिखा। 30 अक्तूबर 1981 को कामरेड गुरु प्रसाद ने तत्कालीन गृह मंत्री ज्ञानी जैल सिंह को इस संबंध में एक पत्र लिखा। 06 फरवरी 1982 को चौरीचौरा स्मारक का शिलान्यास हुआ। 11 साल बाद 19 जुलाई 1993 को इसका उद्घाटन तत्कालीन पीएम नरसिंहा राव ने किया और पेंशन देने की शुरुआत की। चार जनवरी 1994 को पेंशन की पहली किस्त मिली।
इसे भी पढ़ें: गोरखपुर में गूंजा देशभक्ति का तराना, डांस प्रतियोगिता में बच्चों ने दिखाया जलवा
13 जनवरी 1922 को डुमरी खुर्द में मंडल स्थापना के बाद दूसरी मीटिंग चार फरवरी को होनी थी। इस बीच भगवान अहीर को थानेदार गुप्तेश्वर सिंह ने पीट दिया, इससे स्वयंसेवक आहत थे। चार फरवरी को दोपहर एक बजे किसानों के नेतृत्व में दो हजार से ज्यादा गांव वालों ने थाने को घेर लिया। उन्होंने थाना भवन में आग लगा दी, जिसमें 24 सिपाही जल कर मर गए। इसके बाद ब्रिटिश हुकूमत ने जबरदस्त दमन और उत्पीड़न शुरू किया और एक-एक करके सभी विद्रोही गिरफ्तार हुए।
इसे भी पढ़ें: सीएम योगी ने एथेनाल प्लांट का किया शिलान्यास, बोले- सपा बनाना चाहती थी बूचड़खाना, हमने लगाया उद्योग
1000 आंदोलनकारी पकड़े गए थे। 228 आंदोलनकारियों पर मुकदमा चला और 172 को सेशन कोर्ट से फांसी की सजा हुई। महामना मदन मोहन मालवीय ने हाईकोर्ट में पैरवी की, जिसके बाद 153 की फांसी की सजा माफ हुई।
गोरखपुर जिले में कुल 63 शहीदों के परिवार को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पेंशन दी जा रही है। यह आंकड़ा जुलाई 2023 का है। बीते वर्ष यह संख्या 74 थी, जिसमें 11 पेंशन पाने वालों का निधन हो गया। अब इनके परिवार को पेंशन देना बंद कर दिया गया है। नियमानुसार यह पेंशन पति, पत्नी, अविवाहित और बेरोजगार बेटियां (अधिकतम तीन) और मृतक स्वतंत्रता सेनानियों की माता या पिता इस योजना के तहत आश्रित परिवार पेंशन के लिए पात्र हैं।