शुल्क दोगुना होने से विद्यार्थी व उनके अभिभावकों पर बोझ बढ़ेगा। 100 से ज्यादा महाविद्यालयों में पिछले साल ही छात्रों की संख्या घट गई थी। प्रबंधकों को आशंका है कि शुल्क बढ़ने के बाद छात्रों की संख्या और घट जाएगी। दो वर्ष पहले तीन महाविद्यालयों के प्रबंधकों ने आवेदन करके संबद्धता न करने की अपील की थी। उनका कहना था कि छात्र संख्या 50 भी नहीं है। अब संचालन कर पाना कठिन है।
महाविद्यालयों के व्हाट्सएप ग्रुप पर खूब हो रही चर्चा
सेमेस्टर शुल्क के बढ़ने पर महाविद्यालयों के व्हाट्सएप ग्रुप पर भी खूब चर्चा हो रही है। एक महाविद्यालय के प्रबंधक ने लिखा है कि ‘विश्वविद्यालय को यह भी अवश्य निर्धारित कर देना चाहिए कि इस बढ़े हुए शुल्क के आधार पर स्व वित्तपोषित कॉलेज प्रति छात्र कितना शुल्क लें और शिक्षकों को कितना वेतन दें। वहीं, एक प्रबंधक ने लिखा कि कृपया मार्गदर्शन करें कि शासनादेश के अनुसार शुल्क 800 रुपये है, इसके अतिरिक्त अन्य शुल्क विश्वविद्यालय प्रशासन ले सकता है। एक अन्य प्रबंधक ने कहा कि यही हाल रहा तो महाविद्यालयों को बंद होने में देर नहीं लगेगी। मुख्यमंत्री से समय लेकर मिलना चाहिए।