नगर निगम में कनिष्ठ लिपिक पद पर कार्यरत कर्मचारी शरीफ अहमद सेवानिवृत्ति के तीन साल बाद भी नौकरी करने के फर्जीवाड़े में पकड़ा गया है। जन्म तिथि में संशोधन के लिए आवेदन देने के बाद नगर निगम कर्मचारी का फर्जीवाड़ा पकड़ में आया। नगर आयुक्त अविनाश सिंह ने मामले की जांच के लिए कमेटी गठित कर दी है। साथ ही कहा कि कर्मचारी से अतिरिक्त वेतन की रिकवरी भी की जाएगी। नगर निगम के जन्म-मृत्यु कार्यालय में तैनात कनिष्ठ लिपिक शरीफ अहमद को 2019 में ही सेवानिवृत्त होना था, लेकिन वे अपनी जन्मतिथि बदलवा कर अभी तक नौकरी कर रहे हैं।
अधिकारियों के मुताबिक, सेवानिवृत्त कनिष्ठ लिपिक एक बार पहले भी अपनी जन्मतिथि में बदलवा चुका है। दूसरी बार जन्मतिथि बदलवाने की कोशिश में था, लेकिन पकड़ा गया। कनिष्ठ लिपिक की वास्तविक जन्मतिथि 1959 है। इसमें बदलाव कराके उसने 1964 करा लिया था। इस फर्जीवाड़ा के बाद उसे 2024 में रिटायर होना था,लेकिन एक बार और जन्मतिथि में बदलाव कराने का प्रयास शुरू कर दिया। मामला अपर नगर आयुक्त दुर्गेश मिश्रा के पास पहुंचा तो पोल खुल गई। अपर नगर आयुक्त ने मामले की जांच कराने का फैसला किया। उन्होंने एमएसआई इंटर कॉलेज से शरीफ के जन्मतिथि का सत्यापन कराया तो फर्जीवाड़ा खुलकर सामने आ गया। पता चल गया कि वह गलत तरीके से नौकरी कर रहा है।
जांच के लिए गठित की गई कमेटी
मामला संज्ञान में आने के बाद नगर आयुक्त अविनाश सिंह ने जांच के लिए चार सदस्यीय कमेटी गठित कर दी है। इसमें अपर नगर आयुक्त दुर्गेश मिश्रा, अपर नगर आयुक्त मृत्युंजय, उप नगर आयुक्त संजय शुक्ला और लेखाधिकारी रवि सिंह को शामिल किया गया है। कमेटी इस बात की भी जांच करेगी कि पहली बार जन्मतिथि में बदलाव किस आधार पर और किसके द्वारा किया गया।
नगर आयुक्त अविनाश सिंह ने बताया कि, कनिष्ठ लिपिक शरीफ अहमद के मामले की जांच को चार सदस्यीय कमेटी बनाई गई है। मामला बेहद गंभीर है। कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी। साथ ही धनराशि की वसूली भी की जाएगी। जांच में दोषी पाए जाने पर उसके खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराया जाएगा।