नगर निगम के रिकार्ड के मुताबिक, शहर में सबसे ज्यादा जर्जर भवन तिवारीपुर और माधोपुर इलाके में हैं। यह इलाका पुराना है। ज्यादातर भवनों की दीवारों व छत से प्लास्टर उखड़ चुके हैं। सरिया बाहर आ गया है। रेलिंग टूटकर गिर चुकी हैं। बरसात के दिनों में छत से पानी टपकता है। इसके बावजूद लोग रहते हैं।
जर्जर भवनों का आंकड़ा
| वार्ड संख्या |
वार्ड का नाम |
भवनों की संख्या |
| 55 |
अलहदादपुर |
03 |
| 32 |
माधोपुर |
40 |
| 58 |
तिवारीपुर |
25 |
| 68 |
गोरखनाथ |
2 |
| 38 |
दिलेजाकरपुर |
1 |
| 39 |
धर्मशाला बाजार |
1 |
| 40 |
दीवान बाजार |
3 |
| 51 |
इस्माइलपुर |
2 |
| 53 |
काजीपुर |
1 |
| 35 |
बसंतपुर |
1 |
| 64 |
चक्सा हुसैन |
8 |
| 11 |
हुमायूंपुर |
1 |
| 59 |
हासुपुर |
1 |
| 67 |
काली बाड़ी मंदिर |
1 |
| 18 |
जंगल तुलसी राम |
2 |
| 04 |
मानवेला |
4 |
| 09 |
बशारतपुर |
1 |
| 06 |
चरगांवा |
1 |
| 54 |
भेड़ियागढ़ |
3 |
| 31 |
असुरन |
2 |
| 48 |
सूर्यकुंड |
3 |
| 33 |
रसूलपुर |
1 |
नगर निगम के चीफ इंजीनियर सुरेश चंद ने बताया कि नगर निगम का निर्माण विभाग जर्जर भवनों का सर्वे कराता है। अब तक 117 भवन चिह्नित किए गए हैं। कुछ खाली करने तो कुछ को दोबारा मरम्मत कराने के लिए कहा गया है। मरम्मत के जो भी आवेदन आते हैं, उसपर अनुमति दी जाती है। यह सिलसिला लगातार चल रहा है। अगर जर्जर भवनों को गिराने या अन्य कोई कार्रवाई करने का आदेश मिला तो पूरी तैयारी है।