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गोरखपुर: बायो सीएनजी प्लांट की स्थापना को शासन की मंजूरी, 150 करोड़ होगा निवेश

Thu, 03 Nov 2022 12:17 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

प्लांट की स्थापना के लिए आमंत्रित एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (ईओआई) को मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली कमेटी ऑफ सेक्रेरटीज ने हरी झंडी दे दी है। इस प्लांट पर करीबन 150 करोड़ रुपये की धनराशि खर्च होगी।
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बायो सीएनजी प्लांट। (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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गोरखपुर जिले के सहजनवां के सुथनी में बायो सीएनजी प्लांट की स्थापना के लिए शासन ने मंजूरी दे दी है। ठोस अपशिष्ट में शामिल जैविक कूड़े से बायो सीएनजी प्लांट की स्थापना, पीपीपी मोड में इंदौर में बायो सीएनजी प्लांट बनाने वाली कंपनी एयर एनवायरो को सौंपी गई है।
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बुधवार को प्लांट की स्थापना के लिए आमंत्रित एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (ईओआई) को मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली कमेटी ऑफ सेक्रेरटीज ने हरी झंडी दे दी है। इस प्लांट पर करीबन 150 करोड़ रुपये की धनराशि खर्च होगी।

उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर समेत, लखनऊ, गाजियाबाद और वाराणसी में बायो सीएनजी प्लांट के लिए एमओयू हस्तांतरण करेंगे। गोरखपुर के सुथनी में निर्मित किए जा रहे प्लांट को मुख्यमंत्री के निर्देश पर बायो सीएनजी प्लांट के रूप में निर्मित किया जाएगा।
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ईओआई के तहत आवेदन मिलने के बाद नगर आयुक्त अविनाश कुमार सिंह ने एक अक्तूबर को कंपनी को स्वीकृति देने के साथ शासन को रिपोर्ट भेज दी थी। योजना के तहत लखनऊ व गाजियाबाद में बायो सीएनजी प्लांट की क्षमता 300-300 टीपीडी, गोरखपुर और वाराणसी के प्लांट की क्षमता 200 टीपीडी होगी।

इससे रोजाना 27 हजार किलोग्राम बायो सीएनजी का उत्पादन होगा। इन प्लांटों से सालाना दो लाख टन कार्बन डाई आक्साइड एवं ग्रीन हाउस गैस को कम किया जाएगा। नगर निगम के मुख्य अभियंता संजय चौहान ने बताया कि पहले इस मिक्स कचरे का सुथनी में प्लांट लगाया जा रहा था लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद उसे बायो सीएनजी प्लांट के रूप में विकसित किया जा रहा है।

चलाया जाएगा जागरुकता कार्यक्रम : नगर आयुक्त
नगर आयुक्त ने बताया कि कचरे के सेग्रीगेशन के लिए सभी वार्डों में जागरुकता कार्यक्रम संचालित होंगे। आरडब्ल्यूए, एनजीओ, स्वच्छ वातावरण प्रोत्साहन समिति और मोहल्ला समितियों को जोड़ा जाएगा। गीले कचरो को प्रोसेसिंग प्लांट तक भेजने के लिए सभी संसाधनों का समुचित प्रबंधन होगा। हरे-नीले डस्टबिन का वितरण, डोर टू डोर सेग्रीगेटेड कूड़ा कलेक्शन के वाहनों की संख्या बढ़ाई जाएगी। एयर एनवायरो के प्रतिनिधि तकनीकी सहायता भी उपलब्ध कराएंगे। इस कदम से गोरखपुर नगर निगम को गीले कचरो से मुक्ति मिलेगी, कचरे से अतिरिक्त आय का नया साधन भी मिलेगा।
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