पीएम नरेंद्र मोदी व सीएम योगी आदित्यनाथ। (फाइल)
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गोरखपुर-वाराणसी फोरलेन का निर्माण कराने वाले जेपी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी न पीएम की सुनती है न सीएम की। गोरखपुर-वाराणसी फोरलेन बनाने के मामले में कंपनी के आचरण से तो ऐसा ही संदेश जाता है। साल 2016 में शिलान्यास के बाद जिस सड़क को तीन वर्ष में पूरा बन जाना चाहिए था, वह अब तक नहीं बन सकी है। समय से काम नहीं होने पर मुख्यमंत्री योगी ने इसे कई बार चेतावनी दी। कई बार डेडलाइन दी, लेकिन हर बार नतीजा ढाक के तीन पात ही रहा। मामले की शिकायत जब केंद्र सरकार तक पहुंची तो इसकी निगरानी पीएमओ से होने लगी। बावजूद इसके सड़क पूरी नहीं बन पाई। अब उसे पूरा करने के लिए एक बार फिर नई डेडलाइन दिसंबर की दी गई है।
गोरखपुर-वाराणसी फोरलेन का शिलान्यास साल 2016 में केंद्रीय सड़क मंत्री नितिन गडकरी ने कौड़ीराम में एक समारोह में किया था। 2500 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले फोरलेन को तीन साल में पूरा होना था। शिलान्यास के बाद जब काम ने रफ्तार नहीं पकड़ी तो इसकी शिकायत होने लगी। कई बार फर्म को ब्लैकलिस्ट कर अनुबंध समाप्त करने की चेतावनी दी गई। फिर एनएचएआई के अधिकारियों ने कहा कि यदि फर्म का अनुबंध समाप्त किया जाएगा और नया टेंडर होगा तो बहुत समय लगेगा। इस कारण इसी कंपनी को मौका दिया गया। काम की प्रगति गवाह है कि कंपनी ने अपनी कार्यशैली में कोई सुधार नहीं किया।
इसके बाद कंपनी की शिकायत सीएम तक पहुंची। सीएम योगी ने एनएचएआई के अधिकारियों को बुलाकर हिदायत दी। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि समय से गुणवत्तापूर्ण कार्य कराएं। बात आई-गई हो गई। समय बीतता गया, शिकायत होती रही और सीएम चेतावनी देते रहे, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं आया। इसके बाद कंपनी की शिकायत केंद्र सरकार से हुई। फिर सड़क के निर्माण की निगरानी पीएमओ से होने लगी। बांसगांव के सांसद कमलेश पासवान ने केंद्रीय मंत्री गडकरी से मिलकर समय से काम न होने और सड़क की खराब गुणवत्ता की शिकायत की। गडकरी ने सख्ती की तो काम में तेजी आई, लेकिन काम अब भी संतोषजनक नहीं है।