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Exclusive: पीएम और सीएम की भी नहीं सुनती है जेपी इंफ्रास्ट्रक्चर, चेतावनियों के बावजूद समय से काम पूरा नहीं कर पाई कंपनी

Sun, 05 Sep 2021 03:35 PM IST
vivek shukla टीपी शाही, गोरखपुर।

सार

गोरखपुर-वाराणसी फोरलेन बना रही है कंपनी। 2016 में हुआ था शिलान्यास, जिस काम को दो साल पहले हो जाना चाहिए था पूरा वह आज तक अधूरा।
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पीएम नरेंद्र मोदी व सीएम योगी आदित्यनाथ। (फाइल) - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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गोरखपुर-वाराणसी फोरलेन का निर्माण कराने वाले जेपी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी न पीएम की सुनती है न सीएम की। गोरखपुर-वाराणसी फोरलेन बनाने के मामले में कंपनी के आचरण से तो ऐसा ही संदेश जाता है। साल 2016 में शिलान्यास के बाद जिस सड़क को तीन वर्ष में पूरा बन जाना चाहिए था, वह अब तक नहीं बन सकी है। समय से काम नहीं होने पर मुख्यमंत्री योगी ने इसे कई बार चेतावनी दी। कई बार डेडलाइन दी, लेकिन हर बार नतीजा ढाक के तीन पात ही रहा। मामले की शिकायत जब केंद्र सरकार तक पहुंची तो इसकी निगरानी पीएमओ से होने लगी। बावजूद इसके सड़क पूरी नहीं बन पाई। अब उसे पूरा करने के लिए एक बार फिर नई डेडलाइन दिसंबर की दी गई है।
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गोरखपुर-वाराणसी फोरलेन का शिलान्यास साल 2016 में केंद्रीय सड़क मंत्री नितिन गडकरी ने कौड़ीराम में एक समारोह में किया था। 2500 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले फोरलेन को तीन साल में पूरा होना था। शिलान्यास के बाद जब काम ने रफ्तार नहीं पकड़ी तो इसकी शिकायत होने लगी। कई बार फर्म को ब्लैकलिस्ट कर अनुबंध समाप्त करने की चेतावनी दी गई। फिर एनएचएआई के अधिकारियों ने कहा कि यदि फर्म का अनुबंध समाप्त किया जाएगा और नया टेंडर होगा तो बहुत समय लगेगा। इस कारण इसी कंपनी को मौका दिया गया। काम की प्रगति गवाह है कि कंपनी ने अपनी कार्यशैली में कोई सुधार नहीं किया।

इसके बाद कंपनी की शिकायत सीएम तक पहुंची। सीएम योगी ने एनएचएआई के अधिकारियों को बुलाकर हिदायत दी। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि समय से गुणवत्तापूर्ण कार्य कराएं। बात आई-गई हो गई। समय बीतता गया, शिकायत होती रही और सीएम चेतावनी देते रहे, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं आया। इसके बाद कंपनी की शिकायत केंद्र सरकार से हुई। फिर सड़क के निर्माण की निगरानी पीएमओ से होने लगी। बांसगांव के सांसद कमलेश पासवान ने केंद्रीय मंत्री गडकरी से मिलकर समय से काम न होने और सड़क की खराब गुणवत्ता की शिकायत की। गडकरी ने सख्ती की तो काम में तेजी आई, लेकिन काम अब भी संतोषजनक नहीं है।
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अंडरपास का काम हर जगह अधूरा

वैसे गोरखपुर से लेकर बड़हलगंज तक करीब 60 किलोमीटर में बाजार को छोड़कर अधिकतर स्थानों पर फोरलेन का काम हो गया है। जबकि हर बाजार में अंडरपास बनाना है। जहां अंडरपास बनना है वहां अभी मिट्टी का काम नहीं हो पाया है। कौड़ीराम-कसिहार के बीच लगभग चार किलोमीटर तक तीन पुल और सड़क का काम कराया जा है जो अधूरा है। इसी कारण इस समय गोरखपुर-वाराणसी मार्ग पर आवागमन रोक दिया गया है।
 
सीएम सड़कों की करते हैं निगरानी
मुख्यमंत्री योगी जब भी गोरखपुर आते हैं तो अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में सड़कों का हाल जानते हैं। उनकी प्रगति पूछते हैं। गोरखपुर-वाराणसी हाईवे की प्रगति जरूर पूछते हैं। हर बार समय से गुणवत्तापूर्ण कार्य कराए जाने की चेतावनी देते हैं। हर बार पूछते रहे कि कब तक काम पूरा हो जाएगा। कई बार उन्हें डेडलाइन बताई गई। एक बार फिर दिसंबर की डेडलाइन दी गई है।

एनएचएआई परियोजना प्रबंधक सीएम द्विवेदी ने बताया कि गोरखपुर-वाराणसी फोरलेन का 70 प्रतिशत कार्य पूरा हो गया है। एनएचएआई के गोरखपुर मंडल के पास गाजीपुर तक 131 किलोमीटर सड़क थी, उसमें से 100 किलोमीटर काम पूरा कर लिया गया है। जहां-जहां अंडरपास बनना है वहीं काम कराना है। तीन अंडरपास को अक्तूबर तक पूरा कर लिया जाएगा। आमी नदी के क्षेत्र में तीन पुलिया बनाना है। पूरा काम दिसंबर तक पूरा हो जाएगा।
 
सांसद बांसगांव कमलेश पासवान ने बताया कि सड़क का काम समय से और गुणवत्ता पूर्ण नहीं होने की शिकायत केंद्रीय सड़क मंत्री नितिन गडकरी से की थी। उन्होंने इसका संज्ञान लिया और इसके बाद गोरखपुर-वाराणसी फोरलेन की निगरानी पीएमओ से होने लगी। कंपनी ने दिसंबर तक काम पूरा करने का वादा किया है।
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