अंशकालिक शोधार्थी को देना होगा एनओसी
नए अध्यादेश में अंशकालिक शोधकर्ताओं के लिए विशिष्ट मानदंड स्थापित किए गए हैं। एक उम्मीदवार को अंशकालिक माना जा सकता है यदि वह नियोजित (कार्यरत) है। उसे अपने नियोक्ता से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) जमा करना होगा। एनओसी में उम्मीदवार को अंशकालिक अध्ययन की अनुमति, शोध के लिए पर्याप्त समय की अनुमति और पाठ्यक्रम पूरा करने के लिए आवश्यक होने पर ड्यूटी राहत के लिए तत्परता का संकेत देना चाहिए।
अंशकालिक पीएचडी के लिए उम्मीदवारों का चयन एक अलग चयन प्रक्रिया द्वारा होगा, जिसमें राइट-अप, कार्य अनुभव, शैक्षणिक सूचकांक और एक साक्षात्कार शामिल होगा। अंशकालिक शोधकर्ताओं को पर्यवेक्षकों के लिए सुपर-न्यूमेरिक माना जाएगा।
कम से कम पांच साल की होनी चाहिए सेवा
अंशकालिक शोधकर्ता के पास मान्यता प्राप्त शैक्षणिक संस्थानों, सरकारी निकायों, पब्लिक सेक्टर उपक्रम या सूचीबद्ध निगमों में कम से कम पांच साल की निरंतर वरिष्ठ स्तर की सेवा होनी चाहिए। अंशकालिक पीएचडी के लिए कोई फेलोशिप या छात्रवृत्ति प्रदान नहीं की जाएगी। अंशकालिक शोधकर्ताओं को अपने शोध कार्य के दौरान कम से कम 90 दिनों (आवासीय अवधि) के लिए अनुसंधान स्थान पर रहना होगा और पंजीकरण के दौरान इस आशय का एक अंडरटेकिंग देना होगा। उन्हें शोध सलाहकार समिति (आरएसी) के समक्ष अपने शोध पर्यवेक्षक की ओर से विधिवत हस्ताक्षरित प्रगति रिपोर्ट हर छह महीने में जमा करनी होगी।