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गोरखपुर विश्वविद्यालय: कच्चा चावल व कढ़ी में मिलावट पर भड़के छात्रावासी, धरने पर बैठे

Mon, 31 Jan 2022 11:24 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

गोरखपुर विश्वविद्यालय के संतकबीर छात्रावास के मेस में बना था भोजन, मुख्य नियंता व वार्डेन ने समझाबुझाकर शांत कराया।
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गोरखपुर विश्वविद्यालय में प्रदर्शन करते छात्र। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के संतकबीर छात्रावास के छात्रों ने मेस में घटिया भोजन परोसे जाने पर रविवार को जमकर हंगामा किया। चावल के कच्चा होने और कढ़ी में मिलावट का आरोप लगाते हुए छात्र, भगौना (जिसमें खाना पकाया गया) लेकर हॉस्टल के मुख्य द्वार पहुंचे और धरने पर बैठ गए। कुछ ही देर में पहुंचे मुख्य नियंता, वार्डेन ने छात्रों को समझाबुझाकर शांत कराया, जिसके बाद छात्र लौट गए।

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छात्रावास से दोपहर करीब एक बजे छात्र नारेबाजी करते हुए मुख्य द्वार पर पहुंच गए। वे अपने साथ कढ़ी व चावल भगौना साथ लेकर आए थे। छात्रों ने आरोप लगाया कि पिछले कई दिनों से मेस में खराब क्वालिटी का भोजन दिया जा रहा है। रविवार को कढ़ी-चावल बना था। चावल कच्चा था और कढ़ी बनाने में बेसन के साथ आटा मिलाया गया था। जिससे उसका स्वाद खराब था।

वार्डेन प्रो. उमेश यादव और मुख्य नियंता प्रो. सतीश चंद्र पांडेय को छात्रों ने चावल और कढ़ी दिखाया। वार्डेन ने आश्वस्त किया कि भविष्य में अब खराब भोजन नहीं मिलेगा। इसके लिए मेस संचालक को हिदायत दी जाएगी। छात्रों ने कहा कि जब वे शुल्क दे रहे हैं तो उन्हें गुणवत्ता युक्त भोजन दिया जाना चाहिए। अगर भोजन की गुणवत्ता नहीं सुधरी तो वे फिर आंदोलन करेंगे। करीब एक घंटे तक धरने पर बैठे छात्र आश्वासन मिलने के बाद छात्रावास लौट गए।

अनशन करने जा रहे डॉ. संपूर्णानंद को प्रशासन ने रोका

दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर रविवार को आमरण अनशन पर बैठने जा रहे पूर्व संविदा शिक्षक डॉ. संपूर्णानंद मल्ल को प्रशासन ने रोक दिया। डॉ. मल्ल को यह आश्वासन देकर घर भेज दिया गया कि उनकी बात शासन तक पहुंचा दी जाएगी। उधर, डॉ. मल्ल ने मांग न पूरी होने पर सोमवार से एक बार फिर विवि के मुख्य द्वार पर आमरण अनशन की चेतावनी दी है। वह विश्वविद्यालय के कुलपति को हटाने की मांग कर रहे हैं। इससे पहले विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के पूर्व अध्यक्ष प्रो. चित्तरंजन मिश्र, प्रो. उमेश नाथ तिवारी, डॉ. राकेश कुमार तिवारी, डॉ. हरिओम श्रीवास्तव, डॉ. चतुरानन ओझा ने डॉ. मल्ल के घर जाकर समर्थन दिया।

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