बताया कि विवि प्रशासन सभी फाइलों के निस्तारण के प्रतिबद्ध है। महाविद्यालय शिक्षकों के लिए शोध के लिए अवकाश लोन लेने का सर्कुलर जारी करने पर भी सहमति जताई। सभी प्रकार के भुगतान शीघ्र करने का भी आश्वासन दिया। अन्य मांगों पर भी उन्होंने सहमति जताई।
गोरखपुर विश्वविद्यालय में गुआक्टा के बैनर तले प्रशासनिक भवन पर शिक्षकों ने रात भर धरना-प्रदर्शन की तैयारी कर ली थी। लेकिन, कुलपति प्रो. राजेश सिंह से वार्ता के बाद शिक्षकों ने धरना-प्रदर्शन न करने को तैयार हो गए, लेकिन रात में कार्रवाई की नोटिस पर शिक्षक फिर भड़क गए।
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सोमवार को दोपहर 12 बजे से प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल को शाम साढ़े सात बजे कुलपति ने कार्यालय में बुलाया। लेकिन, शिक्षक अपनी मांगों पर अड़े रहे। उनका कहना था कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, धरना प्रदर्शन समाप्त नहीं करेंगे। शिक्षक रात भर धरना देने की तैयारी कर रहे थे, तभी कुलपति कार्यालय से शाम साढ़े सात बजे संदेश आया। गुआक्टा के पदाधिकारियों ने बताया कि कुलपति ने वार्ता के दौरान पांच हफ्ते के ग्रीष्मावकाश को 45 दिन किए जाने की मांग मान ली है। आश्वासन दिया है कि मंगलवार को इसका आदेश जारी हो जाएगा।
बताया कि विवि प्रशासन सभी फाइलों के निस्तारण के प्रतिबद्ध है। महाविद्यालय शिक्षकों के लिए शोध के लिए अवकाश लोन लेने का सर्कुलर जारी करने पर भी सहमति जताई। सभी प्रकार के भुगतान शीघ्र करने का भी आश्वासन दिया। अन्य मांगों पर भी उन्होंने सहमति जताई। अगर अपने वादों से मुकरते हैं तो आगे और तेज आंदोलन किया जाएगा। कुलपति से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में महामंत्री प्रो. धीरेन्द्र सिंह, प्रो अजय मिश्र, डॉ अमृतांशु शुक्ल, डॉ अनूप श्रीवास्तव, डॉ राकेश सिंह, डॉ निरंकार त्रिपाठी, डॉ लोकेश त्रिपाठी शामिल रहे।
प्रो राम अवतार वर्मा, डॉ देवेंद्र मिश्र, प्रो वाचस्पति, प्रो विनय रावत, डॉ रामप्रीत मणि त्रिपाठी, डॉ सूरज गुप्ता, डॉ सुरेश पांडेय, डॉ शत्रुघ्न सिंह, विजय प्रताप निषाद, प्रो सीमा त्रिपाठी, डॉ अंबिका तिवारी, डॉ उमाशंकर तिवारी, प्रो आमोद राय, डॉ राकेश प्रताप सिंह, डॉ योगेंद्र तिवारी, डॉ राम सिंह यादव, प्रो केडी तिवारी, डॉ सत्येंद्र आदि धरने में शामिल रहे।
ये थी शिक्षकों की मांगें
ग्रीष्मावकाश को नियमानुसार 2 महीने किया जाए। शिक्षक समस्याओं के निदान के लिए सिटीजन चार्टर लागू किया जाए। सभी प्रकार के देय का भुगतान यथाशीघ्र किया जाए। नए शिक्षकों को बिना अवकाश के शोध करने की सुविधा दी जाए। महाविद्यालय के प्रोफेसर बने शिक्षकों को विवि की विभिन्न समितियों में जगह दी जाए। स्नातक शिक्षकों को शोध निर्देशक बनाया जाए। गेस्ट हाउस की बढ़ी हुई फीस वापस ली जाए। जिन महाविद्यालयों के प्राचार्य को अभी तक निर्देशक नहीं बनाया गया है उन्हें तुरंत बनाया जाए।
अनुशासनात्मक कार्यवाही करेगा गोविवि
मुख्य नियंता डॉ सत्यपाल सिंह ने कहा कि गोरखपुर विश्वविद्यालय प्रशासन ने गुआक्टा से संबद्ध कॉलेजों के शिक्षकों के प्रदर्शन को खेदजनक बताया है। विश्वविद्यालय प्रशासन महाविद्यालयी शिक्षकों से संबंधित समस्याओं के समाधान के प्रति सकारात्मक है। लेकिन, जिस तरह से शिक्षकों ने अनुशासनहीनता किया है तथा मुख्य गेट का ताला तोड़कर अन्दर प्रवेश कर अभद्रता किया है, उससे विश्वविद्यालय की गरिमा आहत हुई है। विवि प्रशासन प्रदर्शनकारी शिक्षकों के ऊपर अनुशासनात्मक कार्यवाही करेगा। साथ ही सम्बंधित शिक्षकों को विश्वविद्यालय की विभिन्न समितियों से बाहर किए जाने पर भी विचार किया जा रहा है।
गुआक्टा ने लगाया वादाखिलाफी का आरोप
गुआक्टा के अध्यक्ष केडी तिवारी और महामंत्री धीरेंद्र सिंह ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर विश्वविद्यालय प्रशासन पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है। कहा कि विश्वविद्यालय ने नोटिस जारी किया है, जिसकी घोर निंदा करते हैं एवं बार-बार विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से वादाखिलाफी की भर्त्सना करते हैं।