एसटीएफ की गोरखपुर इकाई ने शनिवार को रेलवे रोडवेज स्टेशन से पांच किलो 72 ग्राम चरस के साथ बेतिया पश्चिमी चंपारण बिहार के ग्राम गवनहा निवासी हुसैन अंसारी को गिरफ्तार कर लिया। चरस की कीमत 50 लाख रुपये बताई जा रही है।
हुसैन के खिलाफ कैंट थाने में एनडीपीएस एक्ट के तहत केस दर्ज कराया गया है। एसटीएफ के मुताबिक, हुसैन अंसारी चरस लेकर कानपुर जा रहा था। झकरकट्टी बस स्टेशन पर पीर मोहम्मद व उसके बेटे महसूद को चरस देनी थी। पीर मोहम्मद बस स्टेशन के आसपास ही रहता है। हुसैन अंसारी ने एसटीएफ को बताया कि वह पहले भी दोनों को चरस की आपूर्ति कर चुका है।
अब एसटीएफ एक-एक कड़ी तलाशने में जुट गई है। कानपुर के खरीदारों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। जानकारी के मुताबिक, एसटीएफ को चरस सप्लाई की सूचना मिली थी। इसी आधार पर प्रभारी निरीक्षक सत्य प्रकाश सिंह व दरोगा आलोक राय ने टीम के साथ घेराबंदी कर दी। पहले से मिली सूचना के मुताबिक ही आरोपित हुसैन अंसारी रेलवे रोडवेज बस स्टेशन पहुंच गया। वह रोडवेज की बस से कानपुर जाने की फिराक में था, लेकिन दबोच लिया गया। एसटीएफ के मुताबिक, इस गिरोह के सदस्य मुंबई, चेन्नई, अहमदाबाद व कानपुर सहित कई बड़े शहरों में चरस की खेप पहुंचाते हैं। आरोपी के पास से चरस के अलावा मोबाइल फोन, दो सिमकार्ड सहित तमाम दस्तावेज बरामद किए गए हैं।
हुसैन बिहार के नरकटियागंज से बस पर सवार होकर गोरखपुर पहुंचा था। एसटीएफ गोरखपुर इकाई के प्रभारी निरीक्षक सत्यप्रकाश सिंह ने बताया कि हुसैन अंसारी का भाई हसन अंसारी भी चरस तस्करी में गिरफ्तार किया जा चुका है। वह जेल में बंद है।
नेपाल का फय्याज बेचता है चरस
एसटीएफ के मुताबिक, चरस गिरोह का सरगना नेपाल का फय्याज है। वही चरस यूपी सहित देश के अलग-अलग राज्यों व जिलों में भेजता है। इस गिरोह में बिहार के युवाओं को शामिल किया गया है। युवा चरस लेते हैं और तय स्थान पर पहुंचाकर कमीशन लेते हैं। एक बार चरस पहुंचाने पर 15 से 50 हजार रुपये कमीशन मिलता है। इस गिरोह का जाल यूपी के अलग-अलग जिलों में फैला है। फय्याज भी मूल रूप से बिहार का ही रहने वाला है।
बुलेट प्रूफ जैकेट जैसे बनियान में छिपाई थी चरस
एसटीएफ के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी ने बुलेट प्रूफ जैकेट जैसी बनियान बनवाई थी। यह बनियान शरीर से बिल्कुल कसी हुई थी। इसमें पेट व पीठ की तरफ बड़े-बड़े जेब भी बने थे। इन्हीं जेबों में दस पैकेट चरस रखी गई थी।