दुर्ग स्टेशन पर साधु के वेश में मिला था मुख्य आरोपी
एसएसपी के मुताबिक, व्यापारी प्रसन्ना जैन से तीन महीने पहले ही मुख्य आरोपी रामायण सिंह दुर्ग रेलवे स्टेशन पर साधु के वेष में मिला था। उसने व्यापारी को सोने के दो सिक्के दिए थे। जब व्यापारी ने सोने को चेक कराया तो वह असली था। इसके बाद व्यापारी का भरोसा बढ़ा और सस्ता सोना पाने की लालच में रामायण के बैंक अकाउंट में उस समय दो लाख 90 हजार रुपये भेज दिए थे। कुछ दिन पहले रामायण ने व्यापारी को फोन करके और सोने के सिक्के देने की बात कही। साथ ही पैसे लेकर गोरखपुर बुलाया।
आठ लाख रुपये गोरखपुर लेकर आया था व्यापारी
पुलिस के मुताबिक, छत्तीसगढ़ का व्यापारी 8 लाख रुपये लेकर 26 मई 2022 को गोरखपुर आया था। रामायण ने उसे कैंपियरगंज ओवरब्रिज के पास बुलाया और कहा कि उससे सरदार नामक एक व्यक्ति मिलेगा। वह मरचाही कुटी आ जाए। व्यापारी सरदार उर्फ लाल बहादुर यादव के साथ मरचाही कुटी पहुंचा, जहां से तीन बाइक पर सवार छह लोग रुपये से भरा बैग लेकर भाग निकले।
नेपाल से सोना लाने की बात की थी
मुख्य आरोपी रामायण ने व्यापारी को बताया था कि वे लोग नेपाल से तस्करी कर सस्ता सोना भारत लाते हैं। इसे वे लोग सस्ते दाम पर बेचते हैं। बाल्मिकी नगर का शहाबुद्दीन नेपाल से सोना लाता है। पहले ये लोग एक दो सिक्के असली देते थे। विश्वास में आकर जब कोई और सोना लेने की बात कहता था तो उसे नकली सिक्के देते थे और रुपये लेकर भाग जाते थे।
सोने के सिक्के के बारे में पुलिस को नहीं बताया
घटना के बाद व्यापारी ने सोने के सिक्के के बारे में कुछ नहीं बताया था। व्यापारी ने बताया था कि उसे मंदिर और वृद्धाश्रम निर्माण में दान देने के लिए बुलाया गया था। गोरखपुर आने के बाद मरचाही कुटी ले जाकर रुपयों से भरा बैग बाइक सवार बदमाशों ने छीन लिया और फरार हो गए।