गोरखपुर पुलिस का व्हाट्सएप ग्रुप अपने उद्देश्यों पर पूरी तरह खरा उतर रहा है। आम लोगों को जोड़कर ग्रुप की मदद से बदमाशों पर पुलिस नकेल कसने में पूरी तरह से कामयाब हुई है। हाल के दिनों में दो ऐसे बड़े मामले सामने आए हैं, जिनमें सोशल मीडिया की मदद से पुलिस को सड़क पर खुली गुंडई की ना सिर्फ जानकारी हो पाई, बल्कि चंद मिनटों में ही घटना में शामिल आरोपियों की गर्दन भी दबोच ली गई।
हर थाने का अपना व्हाट्सएप ग्रुप है। इसके एडमिन खुद थानेदार होते हैं। बीट सिपाही अपने-अपने इलाके के संभ्रात लोग, व्यापारी, जनप्रतिनिधि, ग्राम प्रधान, शहर में सभासद को इस ग्रुप में जोड़े हुए हैं, ताकि उन्हें हर घटना के बारे में जानकारी मिल सके। आमतौर पर कोई भी घटना गांव में होती है तो प्रधान को इसकी जानकारी जरूर मिलती है और फिर वे ग्रुप पर पोस्ट करते हैं और फिर पुलिस को जानकारी हो जाती है। इसी तरह आम आदमी भी थाने के नंबर के व्हाट्सएप नंबर पर अपना संदेश भेज सकता है।
एडीजी, डीआईजी, एसएसपी हों या फिर एसपी नार्थ, एसपी साउथ, सीओ सभी का सरकारी नंबर पर व्हाट्सएप ग्रुप चलता है, जिनकी मानीटरिंग वह खुद करते हैं। यहां तक की इस ग्रुप पर आने वाली सूचनाओं पर कार्रवाई के साथ ही सभी के यहां इसका अलग से रजिस्टर बना है, जिसमें शिकायत और की गई कार्रवाई का ब्यौरा होता है।
8 जनवरी को गोरखनाथ इलाके के हड़हवा फाटक के पास आयुष चौधरी नाम के एक युवक को बेरहमी से पीटे जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर आया था। इस वीडियो को एक व्यापारी ने गोरखनाथ थाने के व्हाट्सएप ग्रुप पर डाल दिया था जिसके बाद पुलिस ने तत्काल केस दर्ज कर, अगले ही दिन छह आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
11 जनवरी को गगहा इलाके के जगदीशपुर भलुआन गांव में एक युवक की पिटाई करने का वीडियो वायरल हुआ। एक जनप्रतिनिधि ने इसे थाने के व्हाट्सएप ग्रुप पर डाल दिया। इसके बाद थानेदार ने इसका संज्ञान लिया। इस बीच किसी ने एसएसपी को भी इस व्यक्तिगत तौर पर भेज दिया था। एसएसपी के आदेश पर केस दर्ज कर दो आरोपी दबोच लिए गए।
एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने बताया कि थाने के व्हाट्सएप ग्रुप में अधिकारी भी शामिल हैं। उसकी लगातार निगरानी की जाती है। इसके साथ ही व्यक्तिगत व्हाट्सएप ग्रुप पर भी निगाह रखी जाती है। तत्काल लोगों की मदद के लिए पुलिस काम करती है।