टाइम सिटी में निवेश के नाम पर हुई है 200 लोगों से ठगी
इसके पहले शारदा सिटी के मामले में खेतों में झंडे दिखाकर हो चुकी है ठगी
गोरखपुर। टाइम सिटी के चेयरमैन और निदेशक ने निवेशकों को ताल कंदला में प्लॉट दिखाकर भरोसा जीता था। इसके बाद लोगों ने इसमें जमकर निवेश किया। बाद में करोड़ों रुपये लेकर कंपनी ने गोरखपुर से अपनी दुकान समेट ली। रुपये वापस मांगने पर निवेशकों को जालसाजी की खबर हुई।
बताया जा रहा है कि वर्ष 2013-14 में चंद्र प्रकाश शुक्ला ने ताल कंदला में प्लॉटिंग शुरू की थी। वह रियल इस्टेट को गोरखपुर में लेकर आए थे। पीड़ित राम मिलन का आरोप है कि वर्ष 2014 में उसे और उसके परिचितों को चंद्र प्रकाश शुक्ला ने कंपनी की स्कीम के बारे में समझाया था। उन्हें फर्जी प्रमाणपत्र, आरबीआई का लाइसेंस व जमीन का कागजात दिखाकर झांसे में लिया। कहा कि कंपनी में जो भी धनराशि जमा होगी उसे छह वर्ष में दोगुना करके वापस कर दी जाएगी। यदि धनराशि नहीं लेते तो उन्हें पूर्ण विकसित रिहाइश (भू-खंड) की रजिस्ट्री कर दी जाएगी। इसके लिए ताल कंदला के पास जमीन भी दिखाई थी।
स्कीम से प्रभावित होकर राम मिलन और उसके परिचितों ने करीब 12 लाख रुपये निवेश किए। समयावधि पूरी होने पर जब धनराशि वापस लेने गए तो पता चला कि चंद्र प्रकाश शुक्ला और उसके साथी 1/32 विनम खंड, गोमतीनगर, लखनऊ में निवेशकों के रुपये से खरीदी गई जमीन को बेच रहे हैं। आरोप लगाया कि कंपनी के खाते में जमा रुपये को अपने ही परिवार के सदस्यों के नाम से फर्जी वाउचर बनाकर बैंक खातों में ट्रांसफर कर गबन कर लिया गया। कंपनी से जुड़े लोगों ने वर्ष 2010 में जब काम शुरू किया तो छात्रसंघ चौराहे के पास किराए के मकान में शाखा कार्यालय खोला था। वर्ष 2017 में यह कार्यालय बंद हो गया। इसके बाद से कंपनी के निदेशक लखनऊ से आकर होटल में मीटिंग लेते थे।
खेतों में शारदा सिटी के झंडे दिखाकर हुई थी करोड़ों की ठगी
वर्ष 2023 में नौसड़-खजनी मार्ग पर शारदा सिटी के नाम से नई कॉलाेनी बसाने का सपना दिखाकर 50 से अधिक लोगों से करोड़ों रुपये की जालसाजी का मामला सामने आया था। प्राॅपर्टी डीलर ने कॉलोनी की डिजाइन भी इस तरह तैयार की थी कि उसमें सारी सुविधाएं थीं। लोग कैटलॉग देखकर झांसे में आ गए। इसके बाद फर्जी रजिस्ट्री भी करा दी गई। जब कब्जा के लिए लोग दौड़ने लोग तो जालसाज ऑफिस बंद कर भाग गया। उसने जो तीन मोबाइल नंबर दिए थे, वह भी स्थायी रूप से सेवा में नहीं थे। इसके बाद लोगों को ठगी का अहसास हुआ था। कैंट पुलिस ने जालसाजी के आरोपी प्राॅपर्टी डीलर अक्षय मिश्रा पर एक साथ सात केस दर्ज किया था।