गोरखपुर। वनटांगिया गांव जंगल तिकोनिया नंबर तीन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आगमन का उल्लास छाया हुआ है। यहां प्रशासन अपनी तैयारियों में तो गांव के लोग सीएम के स्वागत में अपने-अपने घर-द्वार को साफ सुथरा बनाने, रंग रोगन करने और सजाने-संवारने में लगे हैं। तैयारी ऐसी मानों उनके घर उनका आराध्य आने वाला हो। महिलाएं उनके स्वागत में फूलों की वर्षा कर स्वागत करने की तैयारी में हैं। वहीं पुरुष भी उनकी तैयारी में कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं। मुख्यमंत्री इस गांव में बृहस्पतिवार को आकर दीपोत्सव मनाएंगे।
जंगल के बीच बसे वनटांगिया गांव जंगल तिकोनिया नंबर तीन में मंगलवार को अपराह्न 3.30 बजे स्कूल से आगे बढ़ते ही बड़ा पंडाल तैयार करने में मजदूर जुटे हुए हैं। वहीं गांव के कुछ लोग तैयारियों की जायजा ले रहे हैं। पंडाल लगाने के संदर्भ में पूछने पर वह सहर्ष ही कह उठते हैं कि बाबा (सीएम योगी) आने वाले हैं। उन्हीं की तैयारी में पंडाल लगाया जा रहा है।
गांव में प्रवेश करने पर कोटेदार रामगणेश के घर के बाहर महिलाएं साफ-सफाई में जुटी हुई हैं। तैयारियों के बारे में पूछने पर उन्होंने बताया कि बाबा यहीं पर दीप जलाएंगे। गांव की महिलाएं पुष्प वर्षा कर उनका स्वागत करेंगी। उनके घर के सामने ही हिंदू विद्यापीठ के सामने गांव के कुछ लोग बैठ कर सीएम के आगमन की तैयारियों पर चर्चा कर रहे थे।
प्रधान प्रतिनिधि नरेंद्र कुमार ने कहा कि गांव को राजस्व गांव को दर्जा देने के साथ उनकी पहल पर आज गांव आवश्यक मूलभूत सुविधाओं से आच्छादित है। चर्चा में शामिल होते हुए रामरेखा, बाढ़ू प्रसाद ने कहा कि पहले वनटांगिया अपने को अभिशापित महसूस कर रहे थे, लेकिन योगी की नजर पड़ी और नजारा यहां का बदल गया। बुजुर्ग रेखई ने कहा कि आज हम जहां बैठे हैं, इस विद्यापीठ को बनवाने में योगी आदित्यनाथ ने केस तक झेला है। उनके संघर्ष की देन है कि वनटांगिया समाज मुख्य धारा से जुड़ गए। वह हमारे लिए आराध्य हैं।
योगी बाबा के नाम जलता है हर दीप
वनटांगिया समुदाय के लिए योगी आदित्यनाथ तारणहार हैं। इनकी सौ साल से अधिक की गुमनामी और बदहाली को सशक्त पहचान और अधिकार दिलाने के साथ विकास संग कदमताल कराने का श्रेय सीएम योगी के ही नाम है। वनटांगिया गांव जंगल तिकोनिया नंबर तीन में हर साल दिवाली मनाने वाले मुख्यमंत्री पहुंचते हैं। उनके प्रयासों से इस गांव समेत गोरखपुर-महराजगंज के 23 गांवों और प्रदेश की सभी वनवासी बस्तियों में विकास और हक-हुकूक का अखंड दीप जल रहा है। प्रधान प्रतिनिधि नरेंद्र कुमान ने बताया कि वनटांगिया गांव जंगल तिकोनिया नंबर तीन में दिवाली पर हर दीप ''''योगी बाबा'''' के नाम से ही जलता है।
सात दिवाली में मिटा दी सारी कसक
मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ ने महज सात दिवाली में वनटांगिया समुदाय की सौ साल से अधिक की कसक मिटा दी है। लोकसभा में वनटांगिया अधिकारों के लिए लड़कर 2010 में अपने स्थान पर बने रहने का अधिकार पत्र दिलाने वाले योगी ने सीएम बनने के बाद अपने कार्यकाल के पहले ही साल वनटांगिया गांवों को राजस्व ग्राम का दर्जा दे दिया। राजस्व ग्राम घोषित होते ही ये वनग्राम हर उस सुविधा के हकदार हो गए जो सामान्य नागरिक को मिलती है। अपने कार्यकाल में उन्होंने वनटांगिया गांवों को आवास, शौचालय, सड़क, बिजली, स्वच्छ जल के लिए पानी की टंकी, स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र और आरओ वाटर मशीन जैसी सुविधाओं से आच्छादित कर दिया है।
ब्रिटिश हुकूमत ने जंगलों में बसाया
ब्रिटिश हुकूमत में जब रेल पटरियां बिछाई जा रही थीं तो स्लीपर के लिए बड़े पैमाने पर जंगलों से साखू के पेड़ों की कटान हुई। इसकी भरपाई के लिए ब्रिटिश सरकार ने साखू के नए पौधों के रोपण और उनकी देखरेख के लिए गरीब भूमिहीनों, मजदूरों को जंगल में बसाया। साखू के जंगल बसाने के लिए बर्मा (म्यामार) की ''''टांगिया विधि'''' का इस्तेमाल किया गया, इसलिए वन में रहकर यह कार्य करने वाले वनटांगिया कहलाए।
कुसम्ही जंगल के पांच इलाकों जंगल तिनकोनिया नंबर तीन, रजही खाले टोला, रजही नर्सरी, आमबाग नर्सरी व चिलबिलवा में इनकी पांच बस्तियां वर्ष 1918 में बसीं। इसी के आसपास महराजगंज के जंगलों में अलग-अलग स्थानों पर इनके 18 गांव बसे। 1947 में देश भले आजाद हुआ लेकिन वनटांगियों का जीवन गुलामी काल जैसा ही बना रहा। जंगल बसाने वाले इस समुदाय के पास देश की नागरिकता तक नहीं थी। नागरिक के रूप में मिलने वाली सुविधाएं तो दूर की कौड़ी थीं। जंगल में झोपड़ी के अलावा किसी निर्माण की इजाजत नहीं थी। पेड़ के पत्तों को तोड़कर बेचने और मजदूरी के अलावा जीवनयापन का कोई अन्य साधन भी नहीं।
जंगल तिकोनिया नंबर तीन एक नजर में
मुख्यमंत्री आवास- 450
अंत्योदय कार्ड- 437
वृद्धा पेंशन- 172
उज्जवला गैस कनेक्शन- 250
कंपोजिट विद्यालय- 300 छात्र
आंगनबाड़ी केंद्र- शुरू करने की तैयारी