एमएमएमयूटी प्रवेश फर्जीवाड़ा: विश्वविद्यालय की रिपोर्ट को आधार बनाकर जांच में जुटी पुलिस
फर्जी सूची के लिए संविदा कर्मचारी की ई-मेल आईडी का किया था इस्तेमाल
गोरखपुर। मदन मोहन मालवीय टेक्निकल यूनिवर्सिटी (एमएमएमयूटी) में प्रवेश फर्जीवाड़ा मामले की जांच पुलिस ने तेज कर दी है। पुलिस ने एमएमएमयूटी की तीन सदस्यीय टीम की नौ पन्ने की विभागीय जांच रिपोर्ट को आधार बनाया है। करीब 70 लाख रुपये के इस फर्जीवाड़े की जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाली बातें सामने आई है। पता चला है कि फर्जीवाड़ा करने के लिए जालसाजों ने प्रधानमंत्री कोटे से प्रवेश का भी झांसा दिया था, जबकि ऐसा कोई कोटा है ही नहीं।
साथ ही फर्जी सूची को अनुमति प्रदान कर आगे बढ़ाने के लिए संविदा कर्मचारी की प्राइवेट ई-मेल आईडी का इस्तेमाल किया गया था। जांच रिपोर्ट से यह भी पता चला है कि जम्मू के रहने वाले पांच युवकों का भी फर्जी तरीके से दाखिला कराया गया था।
एमएमएमयूटी की जांच रिपोर्ट में वरिष्ठ लिपिक रवि मोहन श्रीवास्तव के अलावा चार और लोगों के इस फर्जीवाड़े में शामिल होने की बात कही गई है। पुलिस ने इन चारों को भी अपनी जांच के दायरे में ले लिया है। पुलिस ने रवि मोहन श्रीवास्तव को बुधवार को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, लेकिन रिमांड नहीं मिल पाई। अब पुलिस एसपीओ की मदद से कानूनी दांवपेंच की खामियां दूर करके फिर से रिमांड लेने की कोशिश में जुटी है।
दरअसल, 40 छात्रों के फर्जी प्रवेश का मामला सामने आने पर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से विभागीय जांच भी कराई गई थी। इसके लिए डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. अचल सिंह, प्रमुख सचिव कृपाशंकर सिंह, उच्च शिक्षा विभाग के उप सचिव कैलाशनाथ राय की कमेटी बनाई गई थी।
कमेटी ने रिपोर्ट में साफ लिखा है कि कई स्तर पर कमियां हुई हैं। पहली तो अधिकृत सूची में नाम नीचे बढ़ाया गया और फिर उसमे ईआरपी सेवा को अनुमति के लिए भेजने के लिए एक संविदा कर्मचारी के प्राइवेट ई-मेल का इस्तेमाल किया गया। दूसरा, फर्जी एडमिशन कराने के बाद काउंसलिंग भी हो गई। सभी विद्यार्थियों ने क्लास भी शुरू कर दिया। यानी की हर स्तर पर गड़बड़ी हुई है।
इस रिपोर्ट के बाद विश्वविद्यालय ने नए सिरे से जांच कराने का फैसला लिया है। हालांकि, पुलिस के हाथ यह जांच रिपोर्ट लग गई है, जिसके आधार पर उसने एक-एक बिंदु पर साक्ष्य संकलन शुरू कर दिया है। पुलिस की जांच में कई अहम तथ्य हाथ लगे हैं, जिसके आधार पर जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है।
यह है मामला
एमएमएमयूटी प्रशासन ने 10 जनवरी 2023 को खुलासा किया था कि 40 छात्र-छात्राओं को फर्जी कागजात के जरिये प्रवेश दिया गया था। इनमें सत्र 2020-21 के कुल 22 और सत्र 2021-22 के 18 विद्यार्थी शामिल थे। इन सभी विद्यार्थियों का प्रवेश निरस्त कर दिया गया था। तीन शिक्षक व पांच कर्मचारी जांच की जद में आए थे। इनमें कुछ की संलिप्तता भी मिली थी। आरोप है कि कोटे के तहत नामांकन के लिए दीवान बाजार निवासी प्रकाश गुप्ता के बेटे राहुल गुप्ता ने 2.70 लाख रुपये वरिष्ठ लिपिक रवि मोहन श्रीवास्तव के खाते में दिए थे। छात्र के पिता ने तहरीर देकर केस दर्ज कराया था। पुलिस ने जांच शुरू की तो बड़ा फर्जीवाड़ा खुला। वहीं निष्कासित विद्यार्थियों ने हाईकोर्ट में अपील की थी, लेकिन उन्हें अभी राहत नहीं मिली है। केस डबल बेंच से सिंगल बेंच के पास लौटा दिया गया है।
वर्जन
एमएमएमयूटी की तीन सदस्यीय टीम की जांच रिपोर्ट को आधार बनाकर जांच की जा रही है। साक्ष्य के आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी।
-अभिनव त्यागी, एसपी सिटी