उर्वरक फैक्टरी कॉलोनी में दो दिन पहले हुई थी कार्रवाई
चार साल पहले खेत में बनाया था कारखाना, अब बन गए हैं अगल-बगल घर
चिलुआताल। उर्वरक फैक्टरी काॅलोनी की मेन गली में खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम पहुंची तो लोगों को पहली बार पता चला कि फैक्टरी में पाउडर से खोआ बनाया जा रहा था। दो दिन पहले हुई इस कार्रवाई के बाद अब पूरा इलाका चर्चा में है।
जानकारी के मुताबिक, चार साल पहले तक यह इलाका खाली खेत था। तब यहां एक छोटे कारखाने की नींव रखी गई थी। उस समय आसपास कोई आबादी नहीं थी। खजांची चौराहे से बरगदवां तक फोरलेन बनने के बाद इस इलाके में तेजी से नए घर बनना शुरू हुए और अब यह पूरी तरह रिहायशी काॅलोनी बन चुकी है। आबादी के बीच फैक्टरी बिना रोक-टोक चलती रही। आसपास के लोगों ने बताया कि फैक्टरी से अक्सर सफेद और बदबूदार पानी नाली में बहता दिखता था, जिससे कई बार असहनीय दुर्गंध फैल जाती थी। बताया जाता था कि अंदर डेयरी यूनिट है, जिसका गंदा पानी है। लेकिन दो दिन पहले जब छापा पड़ा तो पता चला कि अंदर खोआ और मिठाई बनाने का काम होता था, वह भी दूध नहीं, बल्कि पाउडर और अन्य मिलावटी पदार्थों से।
पिकअप से आता-जाता है सामान
इस इलाके के रहने वाले संजय मद्देशिया ने बताया कि जिस बाउंड्री के अंदर फैक्टरी चलती है, उसका काले रंग का गेट अक्सर बंद रहता है। जब पिकअप से कोई सामान आता है, तभी गेट खुलता है और गाड़ी के अंदर जाते ही तत्काल बंद हो जाता है। यहां कभी कोई जांच करने नहीं आता था, इसलिए किसी को बहुत कुछ पता भी नहीं चलता था। फैक्टरी से सात आठ मकान के बाद रहने वाले विजय शुक्ला ने बताया कि यहां अधिकांश लोग दूसरी जगह से आकर नया घर बनाए हैं। इसीलिए किसी को बहुत कुछ मालूम नहीं है। दो दिन पहले अखबार पढ़कर जानकारी हुई कि यहां अवैध रूप से खोआ बनाया जाता है। आमतौर पर काॅलोनी की सड़क पर कभी कोई बड़ी गाड़ी दिखती नहीं, इसलिए किसी तरह का कोई शक नहीं हो रहा था।
कोट
अपने इलाके में मिलावटी खोआ की फैक्टरी चल रही है, इसकी जानकारी कल ही हुई थी। अभी यह इलाका नया विकसित हो रहा है। नए लोग हैं तो किसी से बहुत जान पहचान नहीं है।
- हरेंद्र, स्थानीय निवासी
जब से फैक्टरी में नकली खोआ पकड़ा गया है, तब से इसे लेकर चर्चा हो रही है। लोग आश्चर्यचकित हैं कि तीन साल में कोई यहां जांच करने क्यों नहीं आया।
- भकालू, दुकानदार