बर्ड फ्लू : दोनों कौओं का सैंपल जांच के लिए भोपाल भेजा
शासन से आए वरिष्ठ आईएफएस ने देखी चिड़ियाघर की व्यवस्था
गोरखपुर। चिड़ियाघर में बृहस्पतिवार को दो और कौओं की मौत हो गई। दो दिन में चार कौओं की मौत से हड़कंप मच गया है। विशेषज्ञों को आशंका है कि वेटलैंड के पक्षियों से परिसर में संक्रमण फैल रहा है। दोनों मृत कौओं का सैंपल बर्ड फ्लू की जांच के लिए राष्ट्रीय उच्च पशु संस्थान, भोपाल भेज दिया गया है।
उधर, बृहस्पतिवार को लखनऊ से आए सीनियर आईएफएस (इंडियन फॉरेस्ट सर्विस) नीरज कुमार ने दिनभर व्यवस्था देखी। लगातार हो रही वन्यजीवों की मौत को लेकर अधिकारियों से जानकारी ली। नीरज कुमार ने एक-एक बाड़ों के निरीक्षण के दौरान अधिकारियों और कर्मियों से मृत वन्यजीवों के बारे में पूछा। उन्हाेंने बाघ केसरी की मौत की जानकारी लेने के साथ इलाज के बारे में पूछा।
बर्ड फ्लू से बाघिन शक्ति की मौत के बाद पूछा कि आखिर जब जानवर बीमार हुए तो क्या-क्या इलाज किया। जू-कीपरों से लेकर कर्मियों से पूरे दिन पूछताछ करते रहे। वह अपनी रिपोर्ट शासन के आलाधिकारियों को देंगे। इसके बाद से शासन स्तर से कुछ बड़ा फैसला हो सकता है।
चिड़ियाघर के कर्मियों ने बताया कि कौओं की मौत चिड़ियाघर के माउंट के पास हुई है। दो दिनों के अंदर चिड़ियाघर प्रशासन ने 15 सैंपल बर्ड फ्लू जांच के लिए राष्ट्रीय उच्च पशु संस्थान, भोपाल भेजा है। इसके बाद से ही चिड़ियाघर 20 मई तक बंद कर दिया गया है।
चार जानवरों की हुई थी मौत
चिड़ियाघर में बाघ केसरी की मौत 30 मार्च को हुई थी। उसने तनाव में खुद को चोटिल कर लिया था। इसके बाद पांच मई को भेड़िया भैरवी की मौत हो गई। उसने एक दिन पहले पानी कम पीया और अगले दिन सुबह नाइटसेल में दम तोड़ दिया। सात मई को अस्पताल में बाघिन शक्ति की मौत हो गई। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत का कारण मल्टीपल ऑर्गन फेल्योर आया। इसके बाद संक्रमण की आशंका को देखते हुए शक्ति का विसरा राष्ट्रीय उच्च पशु संस्थान, भोपाल भेजा गया। वहां से रिपोर्ट में बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई। उधर, आठ मई को बाड़े में तेंदुआ मोना की मौत हुई थी। उसे कैंसर था, जिसका ऑपरेशन इंडियन वेटनेरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (आईवीआरआई) बरेली की टीम करने वाली थी।
वर्जन..
चिड़ियाघर में बृहस्पतिवार को दो कौओं की मौत हो गई। बर्ड फ्लू की जांच के लिए उनका भी नमूना भोपाल भेज दिया गया है। सभी बाड़ों को सैनिटाइज कर वन्यजीवों के स्वास्थ्य की निगरानी की जा रही है।
- डॉ. योगेश प्रताप सिंह, उप निदेशक एवं मुख्य पशु चिकित्साधिकारी