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Gorakhpur News: नदियों के साथ बुद्ध के रिश्ते को समझना ही यात्रा का मकसद

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नेपाल से शुरू हुई चरथ भिक्खवे-दो यात्रा हुई संपन्न
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गोरखपुर। बुद्ध के विचारों को समाज तक ले जाने के लिए नेपाल से शुरू हुई ''''चरथ भिक्खवे-दो'''' यात्रा का रविवार को समापन हुआ। इस दौरान बौद्ध संग्रहालय में राष्ट्रीय संगोष्ठी, व्याख्यान और कविता पाठ का आयोजन किया गया।

साखी शोधशाला के संस्थापक और यात्रा के संयोजक प्रो. सदानंद शाही ने कहा कि ''''चरथ भिक्खवे-दो'''' में रोहिन नदी के तट की यात्रा का मकसद बुद्ध के संन्यासी जीवन अपनाने के पीछे की इस सच्चाई को जानना और इसे लोगों तक पहुंचाना है। इसके साथ ही नदियों के साथ बुद्ध के रिश्ते को समझना, नदियों के हवाले से देश के सांस्कृतिक भूगोल को जानना और भारत-नेपाल मैत्री को मजबूत करना है।
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गोरखपुर एनवायरमेंटल एक्शन ग्रुप के अध्यक्ष डॉ. शीराज वजीह ने कहा कि नदी तटों पर रहने वाले समुदाय की मांग कुछ और है और नदी पर नियंत्रण रखने वाला राज्य कुछ और कर रहा है। इस कारण नदी का समुदाय से संबंध कमजोर हुआ है। पाली और धम्म पदों के जानकार प्रो. राम सुधार सिंह ने कहा कि जातक कथाओं का अध्ययन बुद्धकालीन जनजीवन को समझने का आधार मुहैया कराते हैं।
अध्यक्षता कर रहीं प्रो. चंद्रकला पाडिया ने कहा कि बुद्ध को जानना अपने अज्ञान और संकीर्णता को जानना और उसको दूर करने का प्रयत्न करना है। मनोज सिंह ने कहा कि रोहिणी नदी को युद्ध के खिलाफ खड़े होने और शांति के लिए आवाज उठाने की प्रतीक के रूप में देखा जाना चाहिए। कार्यक्रम संयोजक प्रो. अनिल राय ने यात्रा के उद्देश्यों पर चर्चा की। इस दौरान यात्रा में शामिल लोगों को सम्मानित किया गया। राजकीय बौद्ध संग्रहालय के निदेशक यशवंत सिंह राठौड़ ने स्वागत किया। अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान के निदेशक राकेश सिंह ने यात्रा को बुद्ध के विचारों को समाज में ले जाने का अनूठा प्रयास बताया।
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कार्यक्रम के दूसरे सत्र में पंकज चतुर्वेदी, विहाग वैभव, अनंत मिश्र, देवेन्द्र आर्य, रघुवंश मणि, यादवेन्द्र, कपिल देव, राजेश मल्ल, वीरेंद्र मिश्र दीपक, प्रमोद कुमार, श्रीधर मिश्र, जयप्रकाश नायक व रंजना जायसवाल आदि ने कविता पाठ किया।
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