10 से 15 हजार रुपये प्रति ट्रिप सीमा पार कराने का लालच देकर गिरोह में कर रहे शामिल
50 से अधिक सीसीटीवी और 16 चेकपोस्ट के बावजूद नहीं रुक रही अवैध गतिविधि
गोरखपुर। कम समय में ज्यादा रुपये कमाने की चाहत में युवाओं के एक वर्ग ने अब पशु तस्करी को अपना धंधा बना लिया है। सूत्रों के अनुसार, बिहार में बैठे तस्करी गिरोह के सरगना इलाके के युवाओं को लालच देकर इस अवैध धंधे में शामिल कर रहे हैं। नतीजा यह है कि पुलिस की लगातार कार्रवाई और निगरानी के बावजूद गोरखपुर व आसपास के सीमावर्ती इलाकों में पशु तस्करी की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, पिछले छह माह में जिले के विभिन्न इलाकों से 30 से अधिक मवेशियों से भरी गाड़ियां पकड़ी गई हैं। जबकि कई बार पुलिस टीमों को तस्करों का सामना करना पड़ा है। चौंकाने वाली बात यह है कि तस्कर हर बार रूट बदल देते हैं, जिससे पुलिस के लिए उनकी गतिविधियों पर लगाम लगाना मुश्किल हो गया है।
पशु तस्करी के इस नेटवर्क की डोर बिहार के सीमावर्ती जिलों पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी और पश्चिम चंपारण से जुड़ी बताई जाती हैं। इन जिलों में बैठे सरगना स्थानीय युवकों को 10 से 15 हजार रुपये प्रति ट्रिप का लालच देकर तस्करी में शामिल करते हैं। इनका काम होता है रात के अंधेरे में गांवों से पशु इकट्ठा करना, उन्हें ट्रक या पिकअप में लादकर सीमापार भेजना। साथ ही गाड़ियों को सुरक्षित पार कराने के लिए रास्ते में स्थानीय पुलिस को मैनेज करना।
सूत्रों के मुताबिक, गोरखपुर-बेतिया, गोरखपुर-देवरिया और बांसगांव-बरहज रूट इन दिनों पशु तस्करी के मुख्य रास्ते बन गए हैं। यहां 50 से अधिक सीसीटीवी कैमरे और 16 से ज्यादा पुलिस चेक पोस्ट होने के बावजूद तस्कर हर रात बिना रोक-टोक के निकल जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि कुछ मामलों में पुलिस की मिलीभगत के कारण तस्कर आसानी से बच निकलते हैं। अधिकारियों के स्तर पर जब यह बात सामने आई कि कैमरों और चेक पोस्ट के बावजूद तस्कर पकड़ से दूर हैं तो पुलिस प्रशासन ने रात्रिकालीन गश्त को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए। गश्त में प्रत्येक थाने के बीट पुलिसकर्मी, मोबाइल वैन और क्राइम ब्रांच की टीम को शामिल किया गया है। साथ ही सीमा क्षेत्रों में ड्रोन निगरानी की तैयारी भी चल रही है।
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कोट
अब किसी भी तस्कर को बख्शा नहीं जाएगा। जो भी व्यक्ति इस धंधे में संलिप्त पाया जाएगा, उसके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट और एनएसए तक की कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा उन लोगों की सूची तैयार की जा रही है, जो पशु तस्करों को ठिकाना या वाहन उपलब्ध कराते हैं।
- एस चनप्पा, डीआईजी रेंज
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तस्करों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की तैयारी
स्थानीय लोगों का कहना है कि बेरोजगारी और जल्द रुपये कमाने की चाहत में कई युवा इस रास्ते पर जा रहे हैं। उन्हें यह अहसास नहीं कि एक बार इस धंधे में फंसने के बाद बाहर निकलना बेहद मुश्किल होता है। पुलिस अब ऐसे युवाओं की काउंसलिंग और गांवों में जागरूकता अभियान चलाने की भी योजना बना रही है। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, एडीजी जोन स्तर से भी रिपोर्ट मांगी गई है और आने वाले दिनों में तस्करी के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया जा सकता है। पुलिस के रडार पर अब सिर्फ तस्कर ही नहीं, बल्कि उनकी मदद करने वाले सरकारी कर्मचारी भी हैं।
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नीट छात्र की हत्या के पकड़े गए तस्करों में अधिकतर युवा
जंगल धूसड़ में हुए नीट छात्र दीपक की हत्या के बाद पुलिस ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए अब तक 27 पशु तस्करों को गिरफ्तार कर जेल भिजवा चुकी है। इसमें नौ तस्करों को पुलिस ने मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार किया है। खास बात यह है कि पकड़े गए तस्करों में ज्यादातर आरोपी 23 से 38 साल के हैं। जो रुपये की लालच में पशु तस्करी के इस धंधे में शामिल हुए हैं। इसका पर्दाफाश जेल भेजे गए तस्करों ने पूछताछ के दौरान किया था।