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Gorakhpur News: छात्रनेता समागम में गूंजा छात्रसंघ बहाली का मुद्दा

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कार्यक्रम में पूर्वांचल के विभिन्न जिलों से जुटे करीब एक हजार वर्तमान व पूर्व छात्रनेता
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बोले-सरकारों की संकीर्ण सोच के कारण विश्वविद्यालयों में प्रतिबंधित है छात्रसंघ
गोरखपुर। सिविल लाइंस स्थित निपाल लॉज में आयोजित छात्रनेता समागम समारोह नई ऊर्जा और उत्साह के साथ रविवार को संपन्न हो गया। समागम में छात्रसंघ बहाली का मुद्दा छाया रहा। वर्तमान से लेकर पिछले पांच-छह दशक पहले तक छात्र राजनीति से जुड़े रहे छात्रनेता जब एक मंच पर जुटे तो माहौल विहंगम हो गया। पिछले एक महीने से की जा रहीं तैयारियों ने इसे मुकम्मल रूप दिया। इसमें पूर्वांचल के विभिन्न जिलों के करीब एक हजार छात्रनेता पहुंचे।

कार्यक्रम की प्रस्तावना एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह ने रखी। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद के पचास वर्षों का भारत का राजनीतिक इतिहास छात्र नेताओं का इतिहास है। यह छात्रसंघ का स्वर्णिम और अप्रतिम युग था, जब लोकतंत्र की नर्सरी से आंदोलनों में तपकर छात्रनेता देश के युवाओं और नौजवानों का नेतृत्व करता था। छात्रसंघों ने देश की राजनीति को परिष्कृत और लोकप्रिय बनाने में अपनी महनीय भूमिका का निवर्हन किया। छात्रसंघ ने देश को डॉ. लोहिया, जयप्रकाश नारायण, विश्वनाथ प्रताप सिंह, चंद्रशेखर, अटल बिहारी बाजपेयी, शंकर दयाल शर्मा, वीर बहादुर सिंह, मोहन सिंह, सुषमा स्वराज, अरुण जेटली जैसे नेता दिए।
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उन्होंने कहा कि यह देश का दुर्भाग्य है कि सरकारों की संकीर्ण सोच के कारण छात्रसंघ प्रतिबंधित है। उन्होंने मुख्यमंत्री से छात्रसंघ बहाली की घोषणा किए जाने की मांग की। अध्यक्षता करते हुए डीडीयू के पूर्व अध्यक्ष 88 वर्षीय निर्मल कुमार उपाध्याय ने कहा कि जो सरकार नौजवानों की भावनाओं का सम्मान नहीं करती है, वह जनता के मन से उतर जाती है।
पूर्व विधायक शीतल पांडेय ने छात्रसंघ के पुरोधाओं को मंच से याद किया। संचालन डॉ विनय सिंह ने किया। कार्यक्रम को एमएलसी डॉ रतनपाल सिंह, दिनेश चन्द त्रिपाठी, संजीव कुमार सिंह, इलाहाबाद विवि के छात्रसंघ अध्यक्ष अवनीश यादव, जितेन्द्र सिंह सेंगर, श्रवण निराला, संजय पाण्डेय, विश्वजीत सिंह, डॉ योगेश प्रताप सिंह, डॉ अन्नू प्रसाद, कर्मवीर सिंह, राजकुमार राय, डॉ उमाशंकर यादव, डॉ महेन्द्र राय और गौतम लाल श्रीवास्तव आदि ने भी संबोधित किया।

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नौजवानों के हृदय की आवाज है छात्रसंघ बहाली
मुख्य अतिथि राजमणि पाण्डेय ने कहा कि मानव समाज का यह नियम है कि यदि सरकार किसी वर्ग को उनके अधिकारों से वंचित करती है तो वह वर्ग और मजबूत बनकर उभरता है और सरकार के पतन का कारण बनता है। छात्रसंघ बहाली की मांग यहां मौजूद हर नौजवान के हृदय की आवाज है, जिसे ठुकराया जाना नौजवानों का अपमान होगा। सरकार छात्रसंघ बहाल करे।
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छात्रसंघ बहाली समेत पारित किए गए तीन प्रस्ताव
पूर्व अध्यक्ष राम सिंह ने छात्रसंघ बहाली का प्रस्ताव रखते हुए कहा कि छात्रसंघ वक्त की मांग है। लोकतांत्रिक मूल्यों और आदर्शों की रक्षा के लिए नौजवानों को नेतृत्व के अवसर दिए जाने चाहिए। पूर्व महामंत्री डॉ चंद्र प्रकाश मणि त्रिपाठी ने डीडीयू को केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाए जाने को लेकर दूसरा प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि सरकार जनभावना का सम्मान करे। पूर्व अध्यक्ष राधेश्याम सिंह ने हाल के वर्षों में छात्रनेताओं पर दर्ज हुए मुकदमे वापस लिए जाने को लेकर तीसरा प्रस्ताव रखा। सभी प्रस्तावों को करतल ध्वनि से सहमति दी गई। यह तय किया गया कि पारित प्रस्तावों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष रखा जाएगा और नौजवानों की भावनाओं का समादर करते हुए उन्हें मंजूर कराया जाएगा।
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