गोरखपुर। मिलावटी चायपत्ती का नियमित सेवन जानलेवा हो सकता है। ऐसा इसलिए कि इसमें मिलाया गया लाल कण सिलिका जैसा है। यह घातक है और इससे आंत में छेद के साथ ही अन्य समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में चायपत्ती खरीदते समय पर्याप्त सावधानी बरतने की जरूरत है।
पहले लिए गए चायपत्ती के नमूनों की जांच रिपोर्ट में घातक रसायन मिल भी चुके हैं। करीब डेढ़ साल पहले बहराइच में चार स्थानों पर छापा मारा गया तो वहां से भारी मात्रा में मिलावटी चायपत्ती जब्त हुई और 16 लोगों पर केस भी हुए थे। यह दीगर बात है कि खाद्य सुरक्षा विभाग को यह जानकारी नहीं मिल सकी कि धंधा करने वालों का ठिकाना कहां है। अभी कुछ दिन पहले ही बस्ती जिले में भी छापा मारकर एक क्विंटल से अधिक मिलावटी चायपत्ती पकड़ी गई थी।
खुले में बिक रही चायपत्ती में मिलावट आसान है। बाजार से जुड़े सूत्र बताते हैं कि इस तरह की चायपत्ती में धंधेबाज सिंथेटिक रंग व कुछ अन्य हानिकारक सामान मिलाकर बेच देते हैं। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, मिलावटखोर सबसे खराब चायपत्ती को खरीदते हैं और उसमें रंग और रसायन मिला देते हैं। छोटे छोटे दुकानों पर इस चायपत्ती की बिक्री करके वे माल खपाते हैं, लेकिन दुकानदारों को भी अपना पता ठिकाना एवं सही मोबाइल नंबर नहीं बताते हैं। यहीं कारण है कि जिनके वहां मिलावटी चायपत्ती पकड़ी जाती है, वे भी उसे बेचने वाले का सही पता नहीं बता पा रहे।
जनरल फिजिशियन डॉ. राजेश कुमार बताते हैं कि पिछली रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख है कि चायपत्ती अधोमानक है, मतलब यह कि इसमें जो तत्व जितनी मात्रा में होने चाहिए, उससे कम या ज्यादा हैं। उदाहरण के तौर पर बहराइच में पकड़ी गई चायपत्ती में पानी की मात्रा 32 प्रतिशत अधिक पाई गई थी। वहीं इसमें आयरन की मौजूदगी भी सामान्य से अधिक है। अन्य अवयवों का अनुपात भी ठीक नहीं है। इसलिए यह चायपत्ती स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है।
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मिलावटी चायपत्ती के खतरे हजार
मिलावट चायपत्ती में सिंथेटिक कलर के साथ सिलिका यानी बालू जैसा पदार्थ है। इस चायपत्ती की नियमित चाय पीने वालों का लिवर व किडनी खराब हो सकता है। इससे एसिडिटी हो सकती है। इस कारण व्यक्ति नियमित रूप से सिर दर्द, उल्टी की चपेट में आ सकता है। सिलिका से आंत में घाव बन सकता है, जिससे दर्द, जलन हो सकता है। इसके साथ ही मुंह या गुदा मार्ग से खून आ सकता है। इसमें मरीज की जान बचाने के लिए इमरजेंसी ऑपरेशन करना पड़ता है। इसमें मिले रसायन जानलेवा साबित हो सकते हैं।
-डॉ. आलोक कुमार पांडेय, रिटायर्ड सीएमओ