रेलवे में एचओ कोटा के तहत टिकट कंफर्म कराने की जांच में जुटी आरपीएफ इंटेलिजेंस और विजिलेंस टीम जुटा रही साक्ष्य
कामर्शियल विभाग में तैनात एक ड्राइवर की भूमिका मिली है संदिग्ध, जल्द हो सकती है पूछताछ
गोरखपुर। रेलवे में अफसरों के नाम का फर्जी लेटर हेड इस्तेमाल कर हेड ऑफिस (एचओ) से टिकट कंफर्म कराने में जुटे दलालों की धरपकड़ में जुटी रेलवे विजिलेंस और आरपीएफ इंटेलिजेंस को अहम सूचना हाथ लगी है। एक अफसर के ड्राइवर पर शक गहराया है, जांच में पता चला है कि ड्राइवर की सेटिंग दलालों से है। जांच टीम जल्द ही ड्राइवर से पूछताछ कर सकती है।
रेल सूत्रों के मुताबिक, ड्राइवर कामर्शियल विभाग में ही तैनात है। जांच टीम को जब यह जानकारी मिली कि उसका संपर्क दलालों से है तो निगरानी तेज कर दी गई। वहीं, उसके मोबाइल फोन पर हुई बातचीत का रिकॉर्ड भी खंगाला जा रहा है। इसके अलावा इलेक्टि्कल विभाग का भी एक कर्मचारी शक के दायरे में आया है। बताया जा रहा है गोरखपुर-यशवंतपुर ट्रेन में जिस अधिकारी के फर्जी पैड लेटर हेड का इस्तेमाल किया गया था वह भी इलेक्टि्कल विभाग के ही हैं। हालांकि, मामला अफसरों के होने के चलते जांच टीमें भी बहुत ही फूंक-फूंक कर कदम उठा रही है।
एचओ कोटा में दलालों की सेंधमारी का मामला पकड़ में आने के बाद रेलवे की विजिलेंस और आरपीएफ इंटेलिजेंस टीम सक्रिय हो गई है। वहीं, एचओ कोटा के तहत आवेदन भेजने वाले अधिकारी भी गहन पूछताछ के बाद ही फार्मेट पर हस्ताक्षर कर रहे हैं। इसके चलते कोटा के लिए आवेदन भी कम हो गए हैं।
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कुछ और मामले आए थे पर दब गए
एचओ कोटा के तहत टिकट कंफर्म कराने के लिए फर्जी लेटर हेड के इस्तेमाल के कुछ और मामले पूर्व में पकड़े गए थे, लेकिन उसे दबा दिया गया। रेल महकमे में इस बात की चर्चा तेज है। जांच टीमें अगर अफसरों के आवेदनों की गहनता से जांच करें तो मामले का खुलासा हो सकता है।