भारत सरकार की ‘जीआईएएन’ परियोजना में शामिल किया गया एमएमएमयूटी
देश-विदेश के प्रसिद्ध विद्वानों को केंद्र सरकार की फंड से आमंत्रित कर सकेगा विश्वविद्यालय
गोरखपुर। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय को भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की प्रतिष्ठित योजना ग्लोबल इनिशिएटिव ऑफ एकेडमिक नेटवर्क्स (जीआईएएन) में शामिल कर लिया गया है। इस नेटवर्क से जुड़ने के बाद एमएमएमयूटी में प्रतिष्ठित राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों के शोधकर्ताओं और शिक्षकों को परिसर में आमंत्रित कर पाना संभव हो सकेगा।
कंप्यूटर साइंस विभाग के डॉ. श्वेत केतु को इस परियोजना का संयोजक नामित किया गया है। तकनीकी शिक्षा, नवाचार व अनुसंधान की दिशा में प्रयासरत एमएमएमयूटी के लिए इस उपलब्धि को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस योजना के तहत प्रत्येक वर्ष विभिन्न चरणों में अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त शोधकर्ताओं और शिक्षकों को अपने परिसर में अल्पकालिक पाठ्यक्रमों, कार्यशालाओं, विशेषज्ञ व्याख्यानों के लिए आमंत्रित किए जाने के लिए सदस्य विश्वविद्यालयों से प्रस्ताव आमंत्रित किए जाते हैं।
प्रत्येक विश्वविद्यालय को प्रत्येक चरण में दो चुनिंदा प्रस्तावों की स्वीकृति मिलती है। योजना के तहत अंतरराष्ट्रीय ख्याति के विद्वानों को आमंत्रित करने के लिए मानदेय सहित आठ से 12 हजार डॉलर तक भुगतान का प्रावधान है। देश के प्रसिद्ध विद्वानों को भी इसके तहत आमंत्रित किया जा सकता है। ख्यातिलब्ध विद्वानों के विश्वविद्यालय में आने से छात्रों और शिक्षकों को वैश्विक स्तर की विशेषज्ञता एवं अनुभव प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
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कोट
जीआईएएन प्लेटफाॅर्म से जुड़ना विश्वविद्यालय के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग, अनुसंधान एवं नवाचार आधारित शिक्षा के नए अवसर प्रदान करेगा। यह विश्वविद्यालय को वैश्विक स्तर पर अग्रणी संस्थानों की श्रेणी में स्थापित करने में सहायक सिद्ध होगा। - प्रो. जेपी सैनी, कुलपति, एमएमएमयूटी