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Gorakhpur News: चौथी रेल लाइन में भी सुरक्षा कवच, आमने-सामने नहीं टकराएंगी ट्रेनें

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गोंडा से बुढ़वल तक सुरक्षा कवच और ऑटोमेटिक सिग्नलिंग सिस्टम लगाने की रेलवे बोर्ड ने दी मंजूरी
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इस सिस्टम के लगने से ट्रेन के आमने-सामने आने पर स्वत: ब्रेक लग जाएगा



गोरखपुर। पूर्वोत्तर रेलवे में छपरा-गोरखपुर-लखनऊ मुख्य रेलमार्ग पर गोंडा से बुढ़वल (55.75 किमी.) के बीच स्वीकृत चौथी रेल लाइन पर ऑटोमेटिक सिग्नलिंग सिस्टम और सुरक्षा कवच सिस्टम भी लगेगा। रेलवे बोर्ड ने इसे मंजूरी दे दी है। सुरक्षा कवच सिस्टम के लगने से ट्रेनों के आमने-सामने आने पर स्वत: ब्रेक लग जाएगा। ट्रेनों को फुल स्पीड में चलाने में आसानी होगी।



पूर्वोत्तर रेलवे में छपरा से लखनऊ तक तीसरी लाइन का निर्माण तेजी से हो रहा है। कवच कार्य के लिए प्रथम चरण में कुल 558 रूट किलोमीटर खंडों को चिह्नित कर कार्ययोजना बनाई गई है। इसमें छपरा से लखनऊ और सीतापुर से बुढ़वल तक का रेलखंड सम्मिलित है। इन रेलमार्गों पर कवच लगाने के लिए टॉवर वर्क के लिए टेंडर अवॉर्ड कर दिया गया है।
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पिछले दिनों बुढ़वल-गोंडा के बीच चौथी लाइन बिछाने के लिए रेलवे बोर्ड से मंजूरी मिल गई थी। इस लाइन पर ऑटोमेटिक सिग्नलिंग सिस्टम और सुरक्षा कवच सिस्टम लगाने की भी स्वीकृति रेलवे बोर्ड ने दी है। एनईआर की यह पहली चौथी लाइन है जिस पर कवच सिस्टम लगाया जाएगा। इसके साथ ऑटोमेटिक सिग्नल सिस्टम लगने से एक पटरी पर ट्रेनें आगे-पीछे चल सकेंगी।



रोजाना 180 ट्रेनें गुजरती हैं इस लाइन से



लखनऊ-गोरखपुर-छपरा रेलमार्ग रेलवे के एचडीएन (हाई डेंसिटी नेटवर्क) श्रेणी में है। इस पर यात्रियों की भीड़ के चलते सर्वाधिक संख्या में ट्रेनों का आवागमन होता है। गोरखपुर स्टेशन से हर दिन करीब 180 ट्रेन व 40 से अधिक मालगाड़ियाें का आवागमन होता है। ट्रेनों की बढ़ती संख्या के बीच हादसे की आशंका भी सर्वाधिक इसी रूट पर है।







यह है कवच की खासियत



स्वेदशी निर्मित कवच तकनीक से ट्रेन चलाते समय लोको पॉयलट के सभी क्रियाकलापों मसलन ब्रेक, हार्न, थ्रोटल हैंडल आदि की निगरानी होती रहेगी। अगर लोको पायलट (ड्राइवर) से चूक होती है तो पहले ऑडियो-वीडियो के माध्यम से अलर्ट आएगा। यदि इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं होती है तो ट्रेन में ऑटोमेटिक ब्रेक लग जाएगा। इसके अलावा ट्रेन को निर्धारित से अधिक गति पर चलने नहीं देगा। कवच प्रणाली जीपीएस, रेडियो फ्रीक्वेंसी आदि तकनीक से संचालित होगा।
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वर्जन



गोंडा से बुढ़वल चौथी लाइन की स्वीकृति के साथ ही इस लाइन को भी ऑटोमेटिक सिग्नलिंग सिस्टम और सुरक्षा कवच प्रणाली से युक्त बनाने की स्वीकृति मिल चुकी है। कवच कार्य के लिए प्रथम चरण में कुल 558 रूट किलोमीटर खंडों को चिह्नित कर कार्ययोजना बनाई गई है। टॉवर वर्क के लिए टेंडर अवॉर्ड कर दिया गया है।



-पंकज कुमार सिंह, सीपीआरओ, एनईआर
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