गोरखपुर। राज नर्सिंग एंड पैरा मेडिकल कॉलेज में प्रवेश के नाम पर छात्रों के साथ धोखाधड़ी मामले में संचालक अभिषेक यादव पर 14 केस कोतवाली थाने में दर्ज किए गए थे। इस मामले में एक ही दिन में जांच कर विवेचकों ने क्लीनचिट देते हुए फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी। शासन के निर्देश पर एक फिर एसपी उत्तरी जितेंद्र श्रीवास्तव ने जांच शुरू की तो 21 विवेचकों के नाम सामने आए थे। जांच में दो विवेचकों (एसआई पीयूष सिंह, वीरेंद्र कुमार यादव) पर दोष साबित हुआ है। इसमें चार वर्ष पहले पीयूष सिंह की मौत हो चुकी है। अब वीरेंद्र कुमार यादव के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
दरअसल, राज नर्सिंग एंड पैरामेडिकल कॉलेज में कूटरचित दस्तावेज तैयार करके निर्धारित से ज्यादा सीटों पर दाखिले का खेल शैक्षिक सत्र 2014-15 में सामने आया। अतिरिक्त सीट पर दाखिले की वजह से ही तमाम छात्र परीक्षा से वंचित हो गए थे। भविष्य तक दांव पर लग गया था। पीड़ित छात्रों ने अलग-अलग तहरीर देकर कोतवाली थाने में जनवरी से अप्रैल 2015 के बीच 14 केस दर्ज कराए गए थे। 23 मई 2016 को सभी मामलों में एफआर लगाकर अभिषेक यादव को बड़ी राहत दे दी गई थी। इस बीच 10 जनवरी 2022 को एक बार फिर कूटरचित दस्तावेज पर दाखिले का मामला सामने आया।
शासन स्तर से मिली तहरीर पर कोतवाली पुलिस ने एक और केस दर्ज किया लेकिन अभिषेक की गिरफ्तारी नहीं हो सकी थी। बाद में छात्रों ने धरना-प्रदर्शन किया। गोरखनाथ मंदिर का घेराव तक करने पहुंच गए। पिपराइच में जाम लगाकर कॉलेज संचालक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की। इसी का नतीजा रहा कि तहसीलदार सदर ने 17 मार्च 2022 को पिपराइच थाने में एक और केस दर्ज करा दिया। मामले में भी अभिषेक यादव को आरोपी बनाया गया। बाद में लखनऊ पुलिस ने भी अभिषेक यादव के खिलाफ जालसाजी का केस दर्ज किया। साथ ही 15 अप्रैल को गोरखपुर स्थित घर से गिरफ्तार करके जेल भिजवा दिया था।