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Gorakhpur News: जिला अस्पताल के पास 4 मेडिकल स्टोर पर छापा, जांच टीम ने जड़ा ताला

Sat, 30 Aug 2025 01:41 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर

सार

जिला अस्पताल और महिला अस्पताल के आसपास स्थित मेडिकल स्टोर के दलाल अस्पताल परिसर में घूमते रहते थे। मरीजों और तीमारदारों को झांसे में लेकर बाहर से दवा खरीदवाते थे। इससे उन पर आर्थिक बोझ पड़ता था। डीएम दीपक मीणा और एसएसपी राजकरन नय्यर के निर्देश पर शुक्रवार को ड्रग विभाग की टीम मेडिकल स्टोर की जांच करने पहुंची।
 
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दवा की दुकान की जांच करती ड्रग विभाग की टीम।
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विस्तार
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मुख्यमंत्री की सख्ती के बाद प्रशासन ने दवा माफिया के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। शुक्रवार को ड्रग विभाग की टीम ने जिला अस्पताल के पास छापा मारकर चार मेडिकल स्टोर बंद कराए। दुकान में ताला लगाकर चाबी अपने पास रख ली, साथ ही कागजी कार्रवाई पूरी होने तक दुकान न खोलने की हिदायत भी दी।

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इनमें एक मेडिकल स्टोर बिना लाइसेंस के संचालित हो रहा था जबकि तीन में लाइसेंस का मानक पूरे नहीं मिले। कार्रवाई से दवा माफिया में हड़कंप मच गया है। अस्पताल में घूमने वाले दलाल भी गायब हो गए हैं।

जिला अस्पताल और महिला अस्पताल के आसपास स्थित मेडिकल स्टोर के दलाल अस्पताल परिसर में घूमते रहते थे। मरीजों और तीमारदारों को झांसे में लेकर बाहर से दवा खरीदवाते थे। इससे उन पर आर्थिक बोझ पड़ता था। डीएम दीपक मीणा और एसएसपी राजकरन नय्यर के निर्देश पर शुक्रवार को ड्रग विभाग की टीम मेडिकल स्टोर की जांच करने पहुंची।

टीम के पहुंचते ही वहां हड़कंप मच गया। अस्पताल में घूमने वाले दलाल भाग निकले। स्टोर से भी कुछ कर्मचारी हट गए। सफेद पर्ची लेकर आए मरीजों और तीमारदारों को संचालकों ने हटा दिया। टीम ने मेडिकल स्टोर में दवा और लाइसेंस की जांच की।

इसके बाद अंकित मेडिकल स्टोर, न्यू किशन मेडिकल स्टोर, विक्की मेडिकल स्टोर और रवि मेडिकल स्टोर का संचालन बंद करा दिया। तीन दुकानों में लाइसेंस के मानकों के अनुरूप कार्य होता नहीं मिला।

अंकित मेडिकल स्टोर बिना लाइसेंस के ही संचालित हो रहा था। कार्रवाई के दौरान सहायक औषधि आयुक्त गोरखपुर मंडल पूरण चंद, ड्रग इंस्पेक्टर गोरखपुर अरविंद कुमार और ड्रग इंस्पेक्टर कुशीनगर दीपक कुमार पांडेय मौजूद रहे।

तीमारदार के साथ हुई थी मारपीट
पिछले दिनों जिला अस्पताल में एक मरीज के तीमारदार ने एजेंटों के दबाव में आकर दवा नहीं खरीदी और खुद सस्ते दाम पर दूसरी दुकान से दवा ले आया। इस पर नाराज मेडिकल स्टोर एजेंटों ने अस्पताल परिसर में घुसकर उसके साथ मारपीट कर की थी। तीमारदार सुशील कुमार भारती की तहरीर पर 20 अगस्त को पुलिस ने केस दर्ज किया।

इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तारी किया गया था। मारपीट की इस घटना के बाद पुलिस ने कार्रवाई तेज की और अगले ही दिन सीओ कोतवाली ओंकार दत्त तिवारी ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान पांच मेडिकल स्टोर एजेंट मौके पर पकड़े गए, जिन्हें पुलिस ने शांतिभंग की धाराओं में चालान किया।

पूछताछ में इन एजेंट ने जिन दुकानों के नाम बताए, उनके खिलाफ ड्रग विभाग को पत्र भेजकर सात दुकानों के लाइसेंस निरस्त कराने की सिफारिश की। डीएम को भी पूरे मामले से अवगत कराया था।
 

मरीजों और तीमारदारों को सस्ती दवा का देते हैं झांसा
जिला अस्पताल परिसर में मेडिकल स्टोर एजेंटों का डेरा कोई नई बात नहीं है। ये एजेंट मरीजों को कम कीमत पर दवा दिलाने का झांसा देकर साथ ले जाते हैं और महंगी दवाएं थमा देते हैं। जबकि प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र पर सस्ती दरों पर वही दवाएं उपलब्ध रहती हैं।

इस तरह मरीजों को धोखा देकर आर्थिक शोषण किया जाता है। पुलिस-प्रशासन का रुख साफ है कि ऐसे दुकानदारों और एजेंटों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
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जांच के लिए भी मरीजों को बहकाते हैं दलाल
जिला अस्पताल और महिला अस्पताल में दलाल मरीजों और तीमारदारों को जांच के लिए भी बहकाते हैं। महिला अस्पताल के अल्ट्रासाउंड सेंटर के आसपास से कुछ महिलाएं मरीजों को झांसा देकर बाहर प्राइवेट केंद्र पर लेकर चली जातीं हैं।

वहां उन्हें जांच के लिए ज्यादा शुल्क देना पड़ता है। हालांकि, पिछले दिनों सीएम योगी आदित्यनाथ ने समीक्षा बैठक के दौरान मरीज माफिया पर सख्ती के निर्देश दिए थे। इसके बाद अस्पताल परिसर में सख्ती बढ़ी और दलालों की सक्रियता कम हो गई है।

डीएम और एसएसपी के निर्देश पर जिला अस्पताल के पास के मेडिकल स्टोर्स की जांच की गई है। यहां चार दुकानों का संचालन बंद करा दिया गया है। अंकित मेडिकल स्टोर बिना लाइसेंस के संचालित हो रहा था। इसके अलावा तीन दुकानों का संचालन मानक के अनुरूप नहीं था। जब तक कमियां पूरी नहीं होती तब तक के लिए व्यापार पर रोक लगाई गई है: पूरण चंद, सहायक औषधि आयुक्त, गोरखपुर मंडल
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