खुद को गोरखपुर का विधायक बताकर जालसाज ने भारतीय स्टेट बैंक की नौसड़ शाखा से 5.70 लाख रुपये की ठगी कर ली। विधायक का नाम सुनते ही बैंक मैनेजर ने बिना जांच किए उनके बेटे के खाते से राशि ट्रांसफर कर दी। जब विधायक के बेटे ने आपत्ति दर्ज कराई तो बैंक को राशि वापस करनी पड़ी। अब जालसाजी की शिकायत बैंक प्रबंधन ने की है। बैंक मैनेजर का तबादला कर दिया गया है।
भारतीय स्टेट बैंक की नौसड़ शाखा में कैंपियरगंज से भाजपा विधायक फतेहबहादुर सिंह के बेटे वीविश्वान सिंह का जीबीएस इंटरप्राइजेज के नाम से खाता है। 31 दिसंबर को जालसाज ने बैंक मैनेजर को फोन कर खुद को विधायक बताया और बेटे के खाते से आईसीआईसीआई की पाटलीपुत्र शाखा में धनराशि ट्रांसफर करने को कहा। जालसाज ने एक ई-मेल भी बैंक को भेजा। बैंक मैनेजर ने बिना जांच पड़ताल के रकम जालसाज द्वारा बताए गए खाते में ट्रांसफर कर दी।
कुछ दिनों बाद विधायक के बेटे ने जब अपना बैंक स्टेटमेंट चेक किया तो रकम गायब देख बैंक से जानकारी मांगी। बैंक अफसरों से शिकायत भी दर्ज कराई। आनन-फानन में इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को दी गई। इसके बाद बैंक प्रशासन ने विधायक के बेटे के खाते में धनराशि जमा करा दी। इस बीच बैंक मैनेजर का तबादला कर दिया गया गया।
मामला साइबर थाने पहुंचा
जालसाजी का यह मामला पहले गीडा थाने गया था, लेकिन आरोपितों तक पुलिस नहीं पहुंच सकी। लिहाजा, मामला साइबर थाने भेज दिया गया। अब साइबर थाना पुलिस मामले की जांच कर रही है।
मिलीभगत की आशंका
जिस हिसाब से जालसाज ने फोन किया और विधायक का नाम लिया, उससे मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है। कहा जा रहा कि बिहार में बैठे जालसाज को विधायक के बेटे के बैंक अकाउंट की जानकारी कैसे मिल गई? जालसाज को यह भी पता था कि विधायक का नाम लेते ही धनराशि मिल जाएगी। इसका मतलब है कि किसी राजदार ने जानकारी जालसाज को दी थी।
जालसाजी बैंक के साथ हुई है। किसी ने फोन किया और खाते से पैसा ट्रांसफर कर दिया गया। बैंक प्रबंधन से शिकायत की गई। हमारा पैसा मिल गया है। मामले में बैंक प्रबंधन को कार्रवाई करनी है।
- वीविश्वान सिंह, निदेशक जीबीएस इंटरप्राइजेज
घटना 31 दिसंबर की है। एक व्यक्ति ने फोन करके शहर के एक सम्मानित व्यक्ति (जिनका खाता शाखा में है) का नाम लिया। साथ ही ई-मेल भेजकर पैसा आईसीआईसीआई बैंक की पाटलिपुत्र शाखा के खाताधारक के खाते में भेजने को कहा। शाखा ने इसे ग्राहक का आदेश समझा और धनराशि ट्रांसफर कर दी। ग्राहक ने शिकायत की तो मामले की छानबीन शुरू हुई। प्रारंभिक जांच के बाद ग्राहक का पूरा पैसा लौटा दिया गया। आईसीआईसीआई बैंक से बिहार के संबंधित खाते पर रोक लगाने का आग्रह किया गया है। भारतीय स्टेट बैंक की तरफ से पुलिस को तहरीर दी गई है।
- मनीष मठपाल, क्षेत्रीय प्रबंधक, गोरखपुर- उत्तर, भारतीय स्टेट बैंक