अच्छी कोचिंग में भाला फेंक का अभ्यास करने लिए फीस जुटाने को नेहा और एथलीट पीयूष सिंह ने रची अपहरण की साजिश
नेहा साहनी दो बार स्टेट और एक बार खेल चुकी है नेशनल, पीयूष सिंह ने 100 मीटर दौड़ में दो बार खेला है नेशनल
गोरखपुर। एथलीट नेहा साहनी और पीयूष सिंह का सपना अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बनने का था। खेल संसाधन जुटाने के लिए दोनों खिलाड़ियों ने गलत रास्ता चुना, जिससे वे किडनैपर (अपहरणकर्ता) बन गए। चौरीचौरा में बालक के अपहरण में दोनों आरोपी पकड़े गए। इसके बाद वे बार-बार अपने किए पर पछता रहे थे।
पीयूष बोल्ट और मिल्खा सिंह की तरह बनना चाहता था पीयूष
पीयूष सिंह ने पुलिस को बताया कि वह देवरिया स्टेडियम में 100 मीटर दौड़ का अभ्यास करता था। 100 मीटर रेस में वह दो बार बिहार राज्य में नेशनल खेलने जा चुका है। वहां जीत दर्ज कर वापस आया था। एक बार वह स्टेट लेवल की प्रतियोगिता में भी शामिल हो चुका है। दोस्तों से उधार रुपये लेकर दौड़ के अभ्यास के लिए महंगे शूज व खाने-पीने का सामान खरीदा था। इधर, अभ्यास के चक्कर में लगातार दोस्तों का उधार बढ़ता जा रहा था। उसे वापस करने का कहीं कोई इंतजाम नहीं दिख रहा था। घरवालों से बताने पर यह डर लग रहा था कि कहीं वे उसका स्टेडियम जाना न छुड़ा दें। इसलिए साथ में अभ्यास करने वाली नेहा के साथ मिलकर अपहरण की साजिश रची। इसमें फंसने के बाद सारे सपने टूटते हुए दिख रहे हैं, उसे अब भविष्य की चिंता हो रही है। उसने कहा-एक बार मुझे मौका मिल जाए, ऐसी गलती फिर दोबारा कभी नहीं करूंगा। घर पर मिल्खा सिंह और बोल्ट की तस्वीरें लगाई हैं। उनके जैसा ही बड़ा खिलाड़ी बनने का सपना देखा था।
नीरज चोपड़ा की फैन है नेहा साहनी
अपहरण की घटना में पकड़े जाने के बाद नेहा साहनी ने पुलिस को बताया कि वह 100 मीटर व 1500 मीटर रेस में दो बार स्टेट और तीन बार नेशनल प्रतियोगिता में शामिल हो चुकी है। नेहा ने बताया कि अब उसे शर्मिंदगी महसूस हो रही है। सोचा था कि देश के लिए खेलकर घरवालों का सिर एक दिन गर्व से ऊंचा करेगी, लेकिन इस कृत्य से पूरा परिवार अपमानित हुआ है। वह नीरज चोपड़ा का हर मैच देखती है, उनकी तरह ही बनना चाहती थी। इसके लिए भदोही में रहने वाले एक सेवानिवृत कोच से उसकी बात हुई थी। उन्होंने एक अच्छे कैंप में प्रवेश दिलाने के लिए कहा था। वहां भाला फेंकने का अभ्यास देश के बड़े शहरों के कोच आकर कराते हैं। प्रवेश के लिए 30 हजार रुपये फीस जमा करनी थी। पिता किसान हैं, छोटी बहन भी एथलीट है। वह भी छोटी-छोटी जरूरतों के लिए परेशान रहती है। सोचा था इस घटना को अंजाम देकर जो भी रुपये मिलेंगे, उससे गुजरात की कोचिंग में प्रवेश लेगी। साथ ही छोटी बहन के लिए भी अच्छे शूज खरीदकर दूंगी। लेकिन उसकी इस गलती से पूरे परिवार का सिर शर्म से झुक गया है।