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Gorakhpur News: अब मिलावटखोरों की भी हिस्ट्रीशीट..लाइसेंस पर होगा उल्लेख

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जिन दुकानों के सामान में होगी मिलावट की पुष्टि, दो बार से अधिक मिलावट की पुष्टि होने पर निरस्त होगा खाद्य लाइसेंस
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ऐसे दुकानदारों पर एक लाख रुपये तक का लगाया जा सकता है जुर्माना
गोरखपुर। पुलिस जिस तरह अपराधियों की हिस्ट्रीशीट खोलती है, उसी तरह अब खाद्य सुरक्षा विभाग भी मिलावटखोरों की हिस्ट्रीशीट तैयार करेगा। इसके लिए जांच रिपोर्ट का जिक्र उनके लाइसेंस पर भी किया जाएगा। दो बार से अधिक मिलावट की रिपोर्ट मिलने पर लाइसेंस निरस्त करने के साथ ही संबधित पर एक लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकेगा। इसके लिए खाद्य सुरक्षा अधिनियम की धारा 64 को प्रभावी बनाया जाएगा।
खाने-पीने के सामानों में मिलावट का धंधा बहुत तेज हो गया है। बाजार में सूजी, मैदान, बेसन, घी, मसाला, तेल, नमकीन, कुट्टू के आटे आदि में मिलावट की पुष्टि हो चुकी है। पनीर और खोवा के नमूने तो बार-बार फेल हो जा रहे हैं। मिठाइयों में मिलावट सबसे आम बात है।
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चायपत्ती और काली मिर्च तक को धंधेबाजों ने केमिकल से रंग डाला है। केला पकाने में केमिकल का प्रयोग हो रहा है तो अदरक जैसे औषधीय गुण वाले कंद को भी इसी से साफ करने की वजह से यह सेहत के लिए नुकसानदेह बन चुका है। अपने मुनाफे के लिए आम लोगों की जान को खतरे में डालने वाले धंधेबाज खुद को नियमों से अनजान बताकर बच निकलते हैं, या इन पर मामूली जुर्माना होता है, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।
खाद्य सुरक्षा विभाग ने ऐसे धंधेबाजों की कुंडली तैयार करने के लिए खाद्य सुरक्षा अधिनियम की धारा 64 का सहारा लेने का निर्णय लिया है। इस नियम के तहत किसी भी खाद्य सामग्री का नमूना फेल होने पर उनके खाद्य लाइसेंस पर भी इसका जिक्र होगा। दो बार से अधिक नमूना फेल होने पर दुकानदार के खिलाफ एक लाख रुपये प्रतिदिन के आधार पर जुर्माना लगाया जा सकेगा।

लाइसेंस पर जिक्र होने से बढ़ेंगी मुश्किलें
खाद्य सामग्री का नमूना फेल होने पर अभी विभागीय रजिस्टर में तो इसका जिक्र होता है, लेकिन लाइसेंस पर उल्लेख नहीं होता था। अफसर बदलते थे तो पुराना हिसाब भी साफ हो जाता था। अगर कहीं मामला बड़ा हुआ तो दुकानदार नया लाइसेंस ले लेते थे। अब इसका जिक्र लाइसेंस वाले कॉलम में होने पर उसके बारे में कभी भी जानकारी ली जा सकेगी।
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वर्जन
खाने-पीने के सामान में मिलावट करने वालों पर सरकार ने सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। यह सीधे तौर पर आम लोगों की सेहत से जुड़ा मामला है, इसलिए इसमें किसी प्रकार की ढील नहीं दी जा सकती। व्यापारी संगठनों को इससे अवगत भी कराया गया है। एक मार्च को इसे लेकर खोवा मंडी के व्यापारियों के साथ बैठक भी होनी है।
-डॉ. सुधीर कुमार सिंह, सहायक आयुक्त, खाद्य सुरक्षा विभाग
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