गोरखपुर। चिलुआताल इलाके के दहला गांव में घर में आग लगाकर भाइयों और बहू की हत्या का आरोपी बेचन निषाद की हरकतों के चलते उसका सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया था। उसे कोई पसंद नहीं करता था। चार दिसंबर को उसके छोटे भाई की शादी हुई तो सगे भाई ने उसे नहीं बुलाया। रिश्तेदार भी दूर होने लगे थे। इससे वह और आग बबूला हो गया और शादी के बाद वह नाराजगी जाहिर करने घर पर भी गया था। दोनों भाइयों से उसकी मारपीट हो गई। बदला लेने के लिए उसने भाइयों को परिवार समेत जिंदा जला दिया।
पुलिस के शिकंजे में फंसने के बाद आरोपी बेचन ने पूछताछ में बताया कि वह चाहता था कि उसकी घर में पूछ हो, लेकिन उसके शराब पीकर मारपीट करने की आदत से धीरे-धीरे करके रिश्तेदार, घरवाले और गांव के लोग दूर होने लगे। उसकी पत्नी और बच्चे भी उससे दूर हो गए थे। इस वजह से उसे गुस्सा आने लगा था।
पुलिस को आरोपी ने बताया कि वह घटना को अंजाम देकर कई जगहाें पर गया, उसे कोई शरण देने को तैयार नहीं हुआ। तब वह हरियाणा के सोनीपत, जहां काम करता था, वहां गया। वहां भी ठेकेदार को सब कुछ पता चल गया था। उसे देखते ही ठेकेदार ने भगा दिया। जब कहीं शरण नहीं मिली तो फिर गोरखपुर वापस आया। यहां पर नेपाल भागने के फिराक में था, इससे पहले ही वह पकड़ लिया गया।
आरोपी बेचन निषाद ने 14 दिसंबर को थिनर (तारपीन का तेल) डालकर कमरे में आग लगा दी थी। आग से बृजेश निषाद (32), पत्नी मधु (28), बच्ची रिद्धिमा (03), अरविंद निषाद (30) और उसकी पत्नी माला (25) झुलस गए थे। बृजेश, अरविंद और उसकी पत्नी माला की मौत हो गई।
पत्नी बच्चों को कर रहा याद
पुलिस के शिकंजे में फंसने के बाद अब बेचन को अपनी पत्नी और दोनों बेटों की याद आ रही है। पुलिस ने जब उससे कहा कि अब तो उसक पूरा जीवन जेल में ही बीतेगा। यह सुनकर वह रोने लगा। बार-बार कह रहा था कि उसे एक बार पत्नी और बच्चे से मिलवा दें। वह अपने बच्चों से बहुत प्यार करता है। उनके लिए ही गांव घर छोड़कर बाहर जाकर मेहनत मजदूरी कर रहा था। उससे बहुत बड़ी गलती हो गई। वह इतने गुस्से में था कि उसे पता ही नहीं चला और इतनी बड़ी घटना को अंजाम दे दिया। उसे बताया गया कि दोनों भाई की मौत हो गई, तब उसकी नजरें नीचे झुक गईं।
बोले पिता-ऐसा बेटा किसी को मत देना भगवान
दहला गांव में सोमवार को एक साथ दोनों भाई बृजेश और अरविंद का शव पहुंचा तो पिता मुन्नीलाल फफक पड़े। मुन्नीलाल ने कहा कि बच्चों को पाल पोसकर बड़ा किया। सभी काम-धाम में लग गए और शादी हो गई। उनकी जिम्मेदारी खत्म हो गई थी, लेकिन बेचन ने पूरा परिवार ही खत्म कर दिया। भगवान ऐसा बेटा किसी को मत दें। बृजेश की पत्नी और बच्ची का भी इलाज चल रहा है। भगवान उनकी रक्षा करें। मुन्नीलाल ने कहा कि किसी भी पिता के तीन बेटे होने पर पिता का कंधा मजबूत हो जाता है। यहां तो वह सबसे कमजोर इंसान हो गया।