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Gorakhpur News: शहर में हर दिन आता है नौ ट्रक पाम ऑयल...बिकता है 15 ट्रक सरसों का तेल

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गोरखपुर। पाॅम ऑयल या ताड़ का तेल वैसे तो एक वनस्पति तेल है, जिसका उपयोग भोजन पकाने के लिए होता है, लेकिन इसमें वसा की मात्रा अधिक होने और कुछ खास रसायनों में प्रयोग की वजह से सरसों के तेल में मिलाने पर रोक है। हालांकि, धंधेबाजों को लोगों की सेहत से कोई खास मतलब नहीं है। यही वजह है कि धंधेबाज धड़ल्ले से पॉम आयल मिश्रित सरसों तेल की बिक्री कर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। शहर में हर दिन करीब नौ ट्रक पाम ऑयल आ रहा है, लेकिन बिक रहा है सरसों का तेल। केवल पाम ऑयल की ब्रिकी बहुत ही कम है।
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गोरखपुर क्षेत्र के हर घर में तड़का लगाने के लिए पहली पसंद सरसों तेल है। शहर के साहबगंज और महेवा मंडी में हर दिन करीब 15 ट्रक सरसों का तेल आता व बिकता है। सरसों के कारोबार से जुड़े किशुन प्रसाद मद्धेशिया बताते हैं कि शुद्ध सरसों का तेल बाजार में मिलना बहुत ही मुश्किल है। ऐसा इसलिए कि मार्केट में जितनी खपत है, उसके मुकाबले आसपास के बाजार में खरीदारी नहीं है। गोरखपुर के मार्केट में सबसे अधिक तेल आगरा और कानपुर से आता है। आगरा, फर्रूखाबाद और मिर्जापुर में सरसों तेल में बड़े पैमाने पर मिलावट पकड़ी जा चुकी है। वहां सरसों के तेल में पाम ऑयल मिलाया जाता है।
महेवा मंडी में एक दुकान पर काम करने वाले कर्मचारी ने बताया कि 10 टीन पाम ऑयल में तीन टीन सरसों तेल और एक डिब्बा खास प्रकार का रसायन मिलाया जाता है, तो पूरा तेल सरसों के तेल जैसा दिखने लगता है। अपने देश में मलेशिया और इंडोनेशिया से पाम ऑयल का आयात होता है। इस तेल में अपनी कोई गंध नहीं है, लेकिन इससे बनाया हुआ सामान कुरकुरा होता है। सरसों के तेल में मिला देने पर यह भी उसके जैसा ही बन जाता है। एक व्यापारी ने बताया कि साहबगंज के पास चौरया गोला में जाएंगे तो सस्ता वाला तेल मिल जाएगा।
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व्यापारी ने बताया कि सरसों तेल खुले बाजार में 138 रुपये लीटर और पाम ऑयल 90 रुपये लीटर है। पाम ऑयल से सरसों तेल बनाया जाता है, तो इसमें मुनाफा अच्छा हो जाता है। शहर में हर दिन 15 ट्रक खाद्य तेलों की बिक्री होती है, जिसमें 60 प्रतिशत पाम ऑयल बिकता है।
अधिक फैटी होने के चलते लिवर को करता है प्रभावित
सरसों के तेल के मुकाबले पाम ऑयल में फैट अधिक होता है। इसीलिए इसमें पका खाना स्वास्थ्य के लिए अधिक लाभदायक नहीं माना जाता है। इसके अलावा पाम ऑयल के रंग को सरसों के तेल के रंग में बदलने के लिए केमिकल का प्रयोग होता है, जो गर्म करने पर हानिकारक हो जाता है। इसलिए जब मिलावटी सरसों के तेल में पका खाना खाते हैं तो इसका असर पाचन तंत्र पर पड़ता है। अंत में लिवर बीमार हो जाता है।
साहबगंज मंडी में भी पकड़ी जा चुकी है मिलावट
साहबगंज के पटेश्वरी मार्केट में छह साल पहले तेल में मिलावट का खेल पकड़ा गया था। इस मामले में मिलावटखोर के खिलाफ राजघाट थाने में केस दर्ज कराया गया था और उसे गिरफ्तार भी किया गया था। इसके साथ ही कई दुकानों में मिला सैंपल फेल हुआ था। हालांकि बाद में कभी ऐसी जांच नहीं हुई, जिससे इस तरह के धंधेबाजों पर रोक लग सके। व्यापारियों का कहना है कि धंधेबाजों के चलते सभी को दिक्कत झेलनी पड़ती है।
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