फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एमएमएमयूटी : चार करोड़ से बनेगी साइबर फॉरेंसिक लैब

विज्ञापन
विज्ञापन
-वित्त समिति की आगामी बैठक में रखा जाएगा प्रस्ताव
विज्ञापन

गोरखपुर। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कंप्यूटर साइंस विभाग में अत्याधुनिक तकनीकी सुविधाओं से युक्त साइबर फारेंसिक लैब की स्थापना की जाएगी। इसे लेकर प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। लैब के निर्माण में करीब 4.18 करोड़ रुपये की लागत आएगी। प्रस्ताव को एजेंडे के रूप में वित्त समिति की आगामी बैठक में रखा जाएगा। अनुमति मिलने के बाद लैब की स्थापना की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
कंप्यूटर साइंस विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डाॅ. वीरेंद्र कुमार शर्मा और असिस्टेंट प्रोफेसर डाॅ. विमल कुमार ने यह प्रस्ताव तैयार किया है। लैब बहु-विषयक केंद्र होगी, जो साइबर अपराधों से निपटने और डिजिटल स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। डिजिटल वेलनेस को बढ़ावा देने के लिए साइबर बुलिंग, ऑनलाइन उत्पीड़न और डिजिटल लत जैसी समस्याओं को लेकर लोगों को जागरूक भी करेगी। इसमें नेटवर्क सुरक्षा की जांच के लिए नेटवर्क फाॅरेंसिक एनालाइजर, डिस्क डुप्लीकेटर, सिक्योर लाॅकर जैसे उपकरण होंगे। इसके अलावा मैलवेयर की जांच, डिजिटल साक्ष्यों की माॅनिटरिंग, सीसीटीवी/डीवीआर डाटा एकत्र करने, इंटरनेट मीडिया की जांच करने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस आधारित विश्लेषण करने, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से बनाई गई तस्वीर, ऑडियो या वीडियो की जांच के लिए उन्नत साॅफ्टवेयर की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।
विज्ञापन


हैकिंग और फिशिंग की होगी जांच
लैब में डिजिटल साक्ष्य संग्रह और विश्लेषण के माध्यम से हैकिंग, फिशिंग और डेटा चोरी जैसे साइबर अपराधों की जांच की जाएगी। इसमें मैलवेयर, रैंसमवेयर और अन्य डिजिटल खतरों पर रोक लगाने के लिए शोध प्रक्रिया भी तेज की जाएगी। यह लैब छात्रों, शोधकर्ताओं, नीति निर्माताओं और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को साइबर खतरों को पहचानने और उनसे प्रभावी ढंग से निपटने के लिए व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करेगी। लैब की एक विशेषता यह भी होगी कि यह संयुक्त राष्ट्र एक ओर से निर्धारित 17 सतत विकास लक्ष्यों में से पांच लक्ष्यों को भी पूरा करेगी। यह पांच लक्ष्य हैं- गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अच्छा रोजगार व आर्थिक विकास, उद्योग, नवाचार और बुनियादी ढांचा, शांति, न्याय व मजबूत संस्थान और लक्ष्यों के लिए साझेदारी।
विज्ञापन

-
वर्जन...
साइबर अपराध के मामले देश में तेजी से बढ़ रहे हैं। इसमें अपराधियों को सजा दिला पाना मुश्किल हो जाता है क्योंकि डिजिटल साक्ष्य नाजुक और आसानी से नष्ट होने योग्य होते हैं। अपराधी डेटा मिटा देते हैं या एन्क्रिप्शन का उपयोग करते हैं, जिससे फोरेंसिक विश्लेषण मुश्किल हो जाता है। इन समस्याओं के समाधान में अपना योगदान देने के लिए विश्वविद्यालय परिसर में साइबर फाॅरेंसिक लैब की स्थापना की जाएगी।
- प्रो. जेपी सैनी, कुलपति
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें