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Gorakhpur News: एमएमएमयूटी का सहायक अभियंता अमित शंकर बर्खास्त

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वित्तीय अनियमितता समेत कई आरोपों में मई 2024 से ही निलंबित था सहायक अभियंता
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प्रबंध बोर्ड से बर्खास्तगी को मिल चुकी है मंजूरी, अब मिनट्स भी हुए जारी

दस से अधिक आरोपों में चल रही थी जांच, संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर कार्रवाई
गोरखपुर। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के चर्चित सहायक अभियंता अमित शंकर को बर्खास्त कर दिया गया है। सहायक अभियंता पर वित्तीय अनियमितता समेत करीब 10 से अधिक गंभीर आरोप थे। इन आरोपों में वह मई 2024 से ही निलंबित चल रहा था। विश्वविद्यालय के प्रबंध बोर्ड ने सहायक अभियंता की बर्खास्तगी को मंजूरी दे दी है। कुलपति प्रो. जेपी सैनी ने बर्खास्तगी की पुष्टि की है।

एमएमएमयूटी ने करीब पांच वर्ष पूर्व चार बीएचके के 32 फ्लैट बनाने की योजना बनाई थी। इसके लिए शासन की ओर से 1191 लाख 86 हजार रुपये आवंटित हुए। निर्माण कार्य पूरा होने से पहले ही धन समाप्त हो गया। इसके बाद कार्यदायी संस्था ने वर्ष 2022 में 2.15 करोड़ रुपये का पुनरीक्षित बजट एस्टीमेट का प्रस्ताव भेजा। मामले में संदेह होने पर तत्कालीन कुलपति प्रो. जेपी पांडेय ने जांच समिति गठित कर दी। जांच समिति ने पाया कि बिना तकनीकी स्वीकृति के कुछ काम हुए हैं। कई कार्य जो हो गए थे, उनका भी एस्टीमेट बनाया गया था। जांच समिति ने यह भी पाया था कि स्थलीय निरीक्षण के बिना प्रस्ताव भेजा गया था। विश्वविद्यालय की समिति ने यह भी पाया कि जो काम शेष हैं, वे 64 लाख रुपये में हो सकते हैं।
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इसके बाद समिति की रिपोर्ट के आधार पर सहायक अभियंता को नोटिस दिया गया। कई बार नोटिस के बाद भी सहायक अभियंता ने नोटिस का जवाब नहीं दिया। आरोपों को देखते हुए मई 2025 में अमित शंकर को निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद भी कई नोटिस का संतोषजनक जवाब नहीं मिला। बीते 30 जुलाई को प्रबंध बोर्ड ने कार्रवाई का निर्णय लिया था। इसके मिनट्स अब तैयार हुए हैं।
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हाईकोर्ट में भी दाखिल किया कैविएट
सूत्रों के मुताबिक, एमएमएमयूटी प्रशासन ने बर्खास्तगी के आदेश जारी करने से पहले प्रयागराज हाईकोर्ट में भी कैविएट दाखिल कर दिया है, ताकि उन्हें वहां से फौरी राहत न मिल सके। आरोपों पर पुख्ता सुबूत तैयार किए गए हैं।

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यह भी हैं आरोप

- अति आवश्यक कार्यों की पत्रावली निर्धारित तिथि के बाद आगे बढ़ाई।

- जेम पोर्टल से खरीदारी के लिए अनावश्यक टिप्पणी लिखकर पत्रावलियां बाधित करना।

- विश्वविद्यालय के कई अधिकारियों से अशिष्ट व्यवहार।

- बिना सूचना के मुख्यालय छोड़ देना और समय से ऑफिस न आना।

- आवासों की विशेष मरम्मत में समय से काम न कराना।

- स्पष्टीकरण मांगने पर प्रस्तुत न करना।

- उप्र विधान परिषद की विलंब समिति की तरफ से निर्देशित होने पर भी भुगतान की पत्रावलियों रोककर रखना।

- कुछ भुगतान की पत्रावलियों को गायब करना

- मेन गेट से मालवीय स्कूल तक बनी सड़क में धांधली के आरोप
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