महाराष्ट्र के रहने वाले अशोक गावंडे की शादी गोरखपुर के हुमायूंपुर दक्षिणी में हुई थी। वह केमिकल फैक्टरी में इंजीनियर थे। उन्होंने महाराष्ट्र में खुद की केमिकल की फैक्टरी लगाई, मगर फैक्टरी नहीं चली और पूंजी डूब गई। इसके बाद अशोक अवसाद में आए गए और पारिवारिक कलह बढ़ने लगी।
करीब चार साल पहले पत्नी और बेटी ने भी साथ छोड़ दिया। मुंबई में पत्नी अलग कमरे में बेटी के साथ रहती है। वहीं, मानसिक रूप से बीमार अशोक को मेंटल अस्पताल में भर्ती कराया था। 22 सितंबर को वह करीब 13 साल बाद ससुराल गोरखपुर आए।
रिश्तेदार (साला) से महाराष्ट्र जाने के लिए 1200 रुपये मांगे, रिश्तेदार ने उन्हें टेंपो से रेलवे स्टेशन पर भेज दिया, मगर मुबंई जाने के बजाय देवरिया के मेडिकल कॉलेज की पानी टंकी में उनका शव मिला। पुलिस को वारदात की सच्चाई से पर्दा उठाना चुनौती बना है।
पुलिस ने साले, पत्नी और बेटी के आलावा अशोक के भाई के मोबाइल नंबर की मदद से तह में जाने की कोशिश कर रही है। गोरखपुर के हुमायूंपुर दक्षिणी के रहने वाले अशोक गावंडे के साले प्रफुल्ल नागरकर अपनी बहन व परिचितों के साथ शुक्रवार के पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे।
मुंबई में केमिकल फैक्टरी लगाई
प्रफुल्ल ने बताया कि जीजा एक केमिकल फैक्टरी में इंजीनियर थे। हरियाणा के भिवानी और गुजरात के अंकलेश्वर में जॉब करते थे। अनीता भी साथ रहती थी। एक बेटी अनुष्का है। अशोक ने 15 साल पहले जॉब छोड़कर मुंबई में केमिकल फैक्टरी लगाई, मगर प्लास्टिक पर उसी समय सरकार ने रोक लगा दी।
40 किमी दूर महाराष्ट्र के पनवेल में रहने लगी बहन
इसके चलते पूंजी डूब गई और फैक्टरी नहीं चली। इसके बाद वह अवसाद में आए गए। प्रफुल्ल ने बताया कि घर का माहौल तनावपूर्ण रहने लगा। करीब चार साल पहले बहन, बेटी को लेकर जीजा के मकान से करीब 40 किमी दूर महाराष्ट्र के पनवेल में रहने लगी।
करीब 13 साल बाद जीजा उसके घर आए और महाराष्ट्र जाने के लिए 1200 रुपये किराया मांगा। उन्हें टेंपो से रेलवे स्टेशन पर भेज दिया, देवरिया वह कैसे पहुंचे और यह सब कैसे हुआ, इसके बारे में कुछ भी जानकारी नहीं है। पुलिस चारदात की निष्पक्ष तरीके से जांच करे। वहीं, चार पहिया वाहन में बैठी अशोक की पत्नी ने कुछ भी बताने से मना कर दिया।
तनु के साथ प्रफुल्ल के दोस्तों ने दिया कंधा
अशोक का शव जब राजघाट पहुंचा तो प्रफुल्ल के साथ उनके छोटी बहन कादम्बरी के पति सचिन, प्रफुल्ल के दोस्त मौजूद थे। वहां उन्होंने दाह संस्कार में तनु को मदद की। प्रफुल्ल के मित्रों का कहना था कि अशोक का दिमागी संतुलन ठीक नहीं था। ऐसे में वह महाराष्ट्र से गोरखपुर कैसे पहुंच गए, यह हैरानी वाली बात है।
महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज के पानी की टंकी में सोमवार को महराष्ट्र के ठाड़े जिले के रहने वाले अशोक गावंडे की लाश मिली थी। उसकी ससुराल गोरखपुर के हुमायूंपुर दक्षिणी मोहल्ले में प्रफुल्ल नागरकर के यहां थी। पुलिस से जानकारी के बाद साला प्रफुल्ल नागरकर और अशोक की पत्नी अनीता शुक्रवार को दोपहर पोस्टमार्टम हाउस पहुंची।
मोर्चरी में शव की पहचान की। पोस्टमार्टम के बाद पत्नी पति का शव लेकर मायके गोरखपुर चली आई। अशोक के साले से बातचीत और जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वह हत्या की ओर इशारा कर रहे हैं। मेडिकल कॉलेज के वार्ड से पानी की टंकी तक अशोक के पहुंचने का रहस्य अब भी बरकरार है। मेडिकल कॉलेज चौकी इंचार्ज पत्नी और साले का बयान भी दर्ज किया।
20 मिनट में ही निकल गए थे ससुराल से
अशोक के साले प्रफुल्ल ने पूछताछ में पुलिस को जो जानकारी दी है, उसमें कई अनसुलझे सवाल हैं। प्रफुल्ल ने बताया कि 1996 में बहन अनीता की शादी हुई, उस समय आना-जाना लगा रहता था। केमिकल की फैक्टरी चालू होने से पहले ही बंद होने से आर्थिक तंगी की चपेट में आ गया। इसके बाद जीजा और दीदी के बीच दूरी बढ़ने लगी।
मानसिक रूप से परेशान जीजा अक्सर घर में विवाद करते थे, इससे तंग आकर दीदी घर छोड़कर पनवेल में बेटी के साथ किराए के मकान में रहने लगी। भांजी अनुष्का फैशन डिजाइन का कोर्स करती है। जीजा अधिक बीमार हुए तो उनके बड़े भाई ने मुंबई के एक मेंटल अस्पताल में भर्ती करा दिया था।
13 साल बाद 22 सितंबर को जब अशोक अपनी ससुराल पहुंचते हैं तो सिर्फ 20 मिनट ससुराल में उनका रुकना, 1200 रुपये जीजा को किराया देना, टेंपो से रेलवे स्टेशन तक भेजना, मानसिक रूप से बीमार होने के बाद किसी को सूचना न देना। यह बड़ा सवाल है।
शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद पत्नी को सुपुर्द कर दिया गया है। वारदात की वजह के बारे में पुलिस पता लगा रही है। अशोक के भाई से पुलिस संपर्क किया था, मगर वह नहीं आए मेडिकल कॉलेज प्रशासन से अशोक का रिकॉर्ड मांगा गया है। -संजय रेड्डी, सीओ सिटी