नगर निगम बोर्ड ने तंबाकू उत्पादों की बिक्री के लिए लाइसेंस शुल्क उपविधि काे दी मंजूरी
गोरखपुर। शहर में तंबाकू के उत्पाद बेचने वालों को अब नगर निगम से लाइसेंस लेना होगा। बिना लाइसेंस के अब तंबाकू, पान मसाला और सिगरेट की बिक्री अपराध होगा। इस पर जुर्माना और सजा भी हो सकती है। नगर निगम बोर्ड ने इस उपविधि को स्वीकृति दे दी है।
पान मसाला और तंबाकू की बिक्री को पहले से कई नियम हैं। लेकिन, लाइसेंस का नियम न होने के कारण इसकी बिक्री कोई कर सकता था। अब कोई भी इसे आसानी से नहीं बेच सकेगा। जो इसके लिए लाइसेंस लेंगे, सिर्फ वहीं बेच सकेंगे। अस्थायी दुकान के लिए 200 रुपये और स्थायी दुकान के लिए 1000 रुपये पंजीकरण शुल्क जमा करना होगा। थोक बिक्री के लिए पांच हजार रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है।
एक साल बाद नवीनीकरण कराने पर भी थोक बिक्री के लिए पांच हजार रुपये और स्थायी दुकान के लिए 200 रुपये व फुटपाथ या गुमटी लगाने वाले अस्थायी दुकानदारों को 100 रुपये पंजीकरण शुल्क जमा करना होगा। किसी भी दुकान पर खुली सिगरेट बेचने की अनुमति नहीं होगी। पकड़े जाने पर जुर्माना वसूला जाएगा। एक लाइसेंस सिर्फ एक दुकान के लिए मान्य होगा, यह हस्तांतरित नहीं किया जा सकेगा।
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पकड़े जाने पर जुर्माना और एफआईआर की कार्रवाई
उपविधि के लागू होने के बाद नगर निगम सीमा क्षेत्र में कोई भी दुकानदार बिना लाइसेंस के तंबाकू उत्पाद व सिगरेट आदि की बिक्री नहीं कर पाएगा। लाइसेंस के बिना कोई भी कॉमर्शियल मॉल, थोक बाजार, बिग बाजार, स्पेंसर्स, जनल मर्चेंट, किराना दुकान, गुमटी आदि पर तंबाकू उत्पादों की बिक्री नहीं होगी। बिना लाइसेंस पहली बार पकड़े जाने पर दो हजार रुपये जुर्माना व सामान जब्त कर लिया जाएगा, जबकि दूसरी बार पकड़े जाने पर पांच हजार रुपये जुर्माना देना होगा। तीसरी बार पकड़े जाने पर पांच हजार रुपये जुर्माना वसूलने के साथ ही बेचने वाले के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी।
बिक्री के लिए शर्त
अपर नगर आयुक्त दुर्गेश मिश्रा ने बताया कि लाइसेंस लेने वाला व्यापारी केवल भारतीय उत्पाद या केंद्र सरकार के आयात नियमों के मुताबिक मंगाए गए सामान ही बेच पाएगा। उन्होंने बताया कि शहर के बाहर का आधार कार्ड होने पर पार्षद से सत्यापन कराना होगा। शैक्षिक संस्थान से 100 मीटर के भीतर स्थित दुकान को तंबाकू बेचने के लिए लाइसेंस नहीं दिया जाएगा।