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खिचड़ी मेला : ठंड में उमड़े श्रद्धालु, लिया मेले का आनंद

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मकर संक्रांति के दूसरे दिन भी लोगों ने गुरु गोरक्षनाथ को चढ़ाई खिचड़ी
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मेले में लोगों ने झूलों पर मस्ती के बाद लिया लजीज व्यंजनों का जायका
गोरखपुर। मकर संक्रांति के दूसरे दिन बुधवार को ठंड के बावजूद गोरखनाथ मंदिर में खिचड़ी चढ़ाने वालों की भीड़ रही। हालांकि पहले दिन की तुलना में भीड़ कम रही। लोगों ने बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाने के बाद मेले का आनंद लिया।
मकर संक्रांति का पर्व भले ही एक दिन मनाया जाता है, लेकिन गोरखनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं के खिचड़ी चढ़ाने का सिलसिला एक महीने तक चलता है। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है। मंगलवार को खिचड़ी चढ़ाने आने वाले भक्तों की संख्या ने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। बुधवार को गोरखनाथ मंदिर में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या कम रही। मंदिर के बाद भक्तों की कतार नहीं लगी थी। मंदिर परिसर के भीतर भक्त कतारबद्ध होकर बाबा को खिचड़ी चढ़ाते रहे। यह सिलसिला देर शाम तक चलता रहा। खिचड़ी चढ़ाने के बाद लोग मेला परिसर में पहुंचे और जमकर मेले का आनंद लिया।
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महिलाओं को क्राकरी, बच्चों को भा रहा झूला
खिचड़ी चढ़ाने के बाद लोगों ने मेले की तरफ रुख करते रहे। मेले में लोगों ने जरूरत के सामान की खरीदारी की। क्राकरी, सजावट के साथ श्रृंगार की दुकानों पर महिलाओं की खासी भीड़ रही। बच्चों के आकर्षण का केंद्र मौत का कुआं और झूले रहे। स्थानीय दुकानदारों के अलावा मेले में बस्ती, कानपुर, मेरठ, कन्नौज, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर समेत अन्य स्थानों के दुकानदारों ने अपनी दुकानें सजाई हैं। बर्तनों की दुकानों पर अधिकतर महिलाएं कप प्लेट के अलावा किचन के सामान खरीदती दिखीं। लोगों ने, टिकिया, चाउमीन, डोस, छोला भटूरा आदि लजीज व्यंजनों का जायका भी लिया।


कोई बाइक तो कोई फूलों के खिंचा रहा फोटो
मोबाइल में भले ही फोटो खींचने की व्यवस्था है, लेकिन मेले में लगे अस्थायी स्टूडियो में फोटो खिंचवाने वालों की संख्या में कमी नहीं आई है। कोई नकली फूलों के साथ फोटो खिंचा रहा है तो कोई स्टाइलिश बाइक पर। कहने का मतलब मेले और फोटो स्टूडियो का रिश्ता बदस्तूर कायम है।
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अब बुढ़वा मंगल के दिन होगी भीड़
खिचड़ी के बाद पड़ने वाले मंगल को बुढ़वा मंगल कहते हैं। इस दिन भक्तों की भारी भीड़ गोरखनाथ मंदिर में उमड़ती है और बाबा को आस्था की खिचड़ी निवेदित करती है। उस दिन का नजारा भी खिचड़ी के जैसा ही होता है। ऐसी मान्यता है कि बुढ़वा मंगल को खिचड़ी चढ़ाने का महातम भी मकर संक्रांति जैसा ही होता है। इस दिन खिचड़ी चढ़ाने वालों में ज्यादातर शहर के लोग होते हैं।
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