गोरखपुर एम्स ने आपदा चिकित्सा प्रबंधन के लिए बनाया भीष्म क्यूब
200 मरीजों का इलाज और 15 सर्जरी करने की क्षमता
गोरखपुर। आपदा प्रबंधन और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को नई दिशा देने के लिए एम्स गोरखपुर में “भीष्म क्यूब सिस्टम” ( भारत हेल्थ इन्टाइटिव फॉर सहयोग, हिता एंड मैत्री) मॉडल का प्रदर्शन किया गया। यह एक मोबाइल मेडिकल यूनिट है, जो आपदा की स्थिति में तुरंत जीवन बचाने में अहम भूमिका निभा सकती है। इसके तहत आपात स्थिति में तत्काल अस्पताल बना सकते हैं, जिसमें 200 लोगों का इलाज संभव होगा।
इसकी जानकारी देते हुए एम्स की कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता ने बताया कि भीष्म क्यूब सिस्टम 72 एल्यूमिनियम मिनी क्यूब्स से मिलकर बना है। इनमें दवाइयां, शल्य उपकरण, आईवी फ्लुइड्स और वॉटर-रेजिस्टेंट टेंट जैसी जरूरी चिकित्सा सामग्रियां पैक रहती हैं। इन्हें हेलिकॉप्टर, एयरक्राफ्ट, ड्रोन या पैराशूट के जरिये सीधे प्रभावित क्षेत्र तक पहुंचाया जा सकता है। वहां कुछ ही मिनटों में इन्हें जोड़कर फील्ड हॉस्पिटल तैयार किया जा सकता है।
इस अवसर पर एयर वाइस मार्शल (सेवानिवृत्त) डॉ. तन्मय रॉय ने बताया कि यह प्रणाली प्रतिदिन 200 मरीजों को आपातकालीन चिकित्सा और 10-15 बुनियादी ऑपरेशन के लिए सक्षम होगी। इसके साथ उपलब्ध विशेष टैबलेट में 180 भाषाओं में निर्देश उपलब्ध हैं। वहीं, आरएफआईडी ट्रैकिंग सिस्टम के जरिये हर क्यूब की निगरानी संभव है। नोडल अधिकारी डॉ. अरुण पांडेय ने कहा कि यह तकनीक विशेषकर उत्तर प्रदेश और पूर्वांचल में आपदा प्रबंधन को नई मजबूती देगी। इसके लिए प्रशिक्षित टीम तैयार की जा रही है, जो आपात स्थिति में तुरंत इन क्यूब्स को तैनात कर सकेगी।
भीष्म क्यूब की खासियतें
- 36 मिनी क्यूब = एक मदर क्यूब, दो मदर क्यूब = एक भीष्म क्यूब।
- प्रतिदिन 200 मरीजों का उपचार और 10-15 सर्जरी।
- प्रत्येक मिनी क्यूब का वजन 20 किलो, एक व्यक्ति आसानी से उठा सकता है।
- दवाइयां, उपकरण, टेंट व जीवन रक्षक सामग्री से सुसज्जित।
- थल, जल, वायु और ड्रोन से कहीं भी तैनात करने योग्य।
- सीमित अवधि तक स्वयं बिजली और ऑक्सीजन उत्पादन की क्षमता।