- मस्जिदों में जुमे की नमाज में बयां की गई रमजान की अहमियत
गोरखपुर। माह-ए-रमजान के आगमन के मद्देनजर शुक्रवार को सब्जपोश हाउस मस्जिद, जाफरा बाजार में दीनी परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत कुरआन-ए-पाक की तिलावत से हुई, इसके बाद हम्द व नात पेश की गई।
मुख्य वक्ता मुफ्ती अख्तर हुसैन मन्नानी ने कहा कि इंसान जिस्म और रूह से मिलकर बना है लेकिन उसकी असल पहचान उसकी रूह है। अल्लाह ने रमजान को इंसान की रूहानी तरबियत और पाकीजगी के लिए मुकद्दस महीना बनाया है। यह सब्र का महीना है और सब्र का बदला जन्नत है। रमजान में की गई नेकी का सवाब कई गुना बढ़ा दिया जाता है और यह महीना गुनाहों से तौबा करने का बेहतरीन अवसर देता है।
उन्होंने कहा कि रोजा इंसान को बुराइयों से दूर रखकर अल्लाह के करीब करता है। इस माह में जकात, सदका और फित्रा के जरिये जरूरतमंदों की मदद करना भी बेहद जरूरी है।
अंत में मुल्क में अमन-चैन, तरक्की और भाईचारे की दुआ की गई। संचालन हाफिज रहमत अली निजामी ने किया। कार्यक्रम में हाजी बदरुल हसन, मुहम्मद रूशान, नेहाल अहमद, मुहम्मद आसिफ और कारी मुहम्मद अनस रजवी समेत अन्य लोग मौजूद रहे।