- औने-पौने दाम पर खरीदते हैं एक्सपायरी माल..छोटे दुकानदारों के यहां खपाते, चल रहा करोड़ों का खेल
- सहजनवां में पकड़ी गई एक्सपायरी सरसों तेल की बड़ी खेप, ज्यादातर स्टॉक पहुंच चुका बाजार में
- पहले भी पकड़ा जा चुका है एक्सपायर्ड नमकीन, खजूर और कोल्ड ड्रिंक की खेप
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। होली में धंधेबाजों ने मिलावटी खाद्य सामग्रियों के अलावा ही एक्सपायर्ड माल भी खपाना शुरू कर दिया है। ब्रांडेड कंपनियों के एक्सपायर्ड सरसों तेल, नमकीन, मिठाइयां और कोल्ड ड्रिंक्स धंधेबाज औने-पौने दामों में खरीद लेते हैं और उन्हें छोटे दुकानदारों के यहां खपा देते हैं। मुनाफे के चक्कर लोगों के सेहत से खिलवाड़ करने वाले धंधेबाज करोड़ों का खेल करते हैं। ज्यादातर लोग सामान खरीदने के बाद एक्सपायरी डेट नहीं देखते हैं, जिसके चलते इन सामग्रियों को बाजार में खपाना आसान हो जाता है। इसलिए, सतर्क रहें और सामान खरीदते समय एक्सपायरी डेट जरूर देखें।
हाल ही में सहजनवां स्थित फैक्टरी में एक्सपायर्ड सरसों तेल पकड़ा गया है। जबकि, ज्यादातर स्टॉक बाजार में पहुंच चुका है। मंडी के सूत्रों के मुताबिक, होली में रोजाना करीब पांच करोड़ रुपये का मिलावटी और एक्सपायर्ड माल खपाया जा रहा है
सूत्रों के मुताबिक, यह पूरा नेटवर्क थोक गोदामों से संचालित होता है। कंपनियों या बड़े डिस्ट्रीब्यूटर के पास बचा एक्सपायर्ड माल औने-पौने दाम पर खरीद लिया जाता है। जांच में मामला न फंसे इसके लिए कागजी कार्रवाई दुरुस्त रखी जाती है। मसलन, कंपनी के गोदाम में एक्सपायरी माल को डैमेज दिखा दिया जाता है जबकि वह माल बाजार से मंगाया ही नहीं जाता है।
तेल के एक व्यापारी ने बताया कि 15 लीटर के जिस सरसों तेल टिन की थोक कीमत 2200 से 2500 रुपये होती है, वही एक्सपायर्ड स्टॉक 800 से 1000 रुपये में मिल जाता है। इसे नई पैकिंग और बदली हुई एक्सपायरी डेट के साथ 1900 से 2100 रुपये तक में बेचा जाता है। इस तरह प्रति टिन 900 से 1200 रुपये का सीधा मुनाफा कमाया जाता है। यदि एक खेप में 2000 टिन भी खपाए जाएं, तो मुनाफा 20 लाख रुपये से ऊपर पहुंच जाता है।
नमकीन की करते हैं नई पैकिंग
केवल तेल ही नहीं बल्कि नमकीन, मिठाई और कोल्ड ड्रिंक भी इस अवैध कारोबार का हिस्सा है। सूत्रों ने बताया कि त्योहार से पहले बड़ी मात्रा में एक्सपायर्ड पैकेज्ड नमकीन और पेय पदार्थ गोदामों में जमा किए जाते हैं। 100 रुपये खुदरा मूल्य वाले नमकीन पैकेट को एक्सपायर्ड होने के बाद 15 से 25 रुपये में खरीदा जाता है। नई पैकिंग या स्टिकर के जरिये उसे 70 से 80 रुपये में बाजार में उतार दिया जाता है। हजारों पैकेट की एक खेप में ही लाखों रुपये का लाभ अर्जित कर लिया जाता है।
नमकीन के व्यापारी दिनेश गुप्ता ने बताया कि होली के समय मांग इतनी बढ़ जाती है कि खुदरा दुकानदार स्टॉक की जांच में ढिलाई कर देते हैं। कुछ धंधेबाज इसी मौके का फायदा उठाते हैं। एक्सपायर्ड माल को ताजा स्टॉक में मिलाकर बेचा जाता है। ज्यादातर उपभोक्ता तारीख देखते ही नहीं है। इस धंधे में जोखिम कम और मुनाफा ज्यादा होने के कारण हर साल त्योहार से पहले ऐसी गतिविधियां बढ़ जाती हैं। पिछले वर्ष खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने एक्सपायर्ड नमकीन जब्त किया था।
ठेलों पर खपाते हैं एक्सपायर्ड नमकीन
व्यापारी राकेश बताते हैं कि एक्सपायर्ड नमकीन को बहुत सारे दुकानदार खुले में बेच देते हैं। चाट-फुल्की के ठेलों पर इसे खपा दिया जाता है। 20 प्रतिशत दाम देकर सफेद पैकिंग में करने के बाद 60 से 70 प्रतिशत में बेच दिया जाता है। यह आसानी से खप भी जाता है। मिठाई की दुकानों पर भी इसकी सप्लाई होती है। त्योहार के दौरान तीन से पांच करोड़ रुपये तक की एक्सपायर्ड नमकीन खपाने का अनुमान है।
कोल्ड ड्रिंक की बोतल पर नई डेट
व्यापारी अमित मद्देशिया ने बताया कि एक्सपायर्ड कोल्ड ड्रिंक की बोतलों पर नई मैन्युफैक्चरिंग डेट प्रिंट करने के लिए स्थानीय स्तर पर मशीनों का उपयोग किया जाता है। मिठाई के मामले में पुराने स्टॉक को दोबारा तलकर या शक्कर की परत चढ़ाकर ताजा जैसा दिखाया जाता है। कई बार एक्सपायर्ड घी और तेल को मिलाकर गुझिया और अन्य मिठाइयां तैयार की जाती हैं।
वर्जन
त्योहार के दौरान अभियान तेज कर दिया गया है। उपभोक्ताओं से अपील है कि खरीदारी करते समय पैकेट पर निर्माण और एक्सपायरी तिथि अवश्य जांचें, संदिग्ध रूप से सस्ते उत्पादों से बचें और किसी भी अनियमितता की सूचना तुरंत संबंधित विभाग को दें।
- डॉ. सुधीर कुमार सिंह, सहायक आयुक्त, खाद्य सुरक्षा
एक्सपायर्ड खाद्य पदार्थों के सेवन से लिवर-किडनी पर गंभीर खतरा
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। त्योहारों के समय बाजार में बढ़ती मांग का फायदा उठाकर कई व्यापारी एक्सपायर्ड खाद्य पदार्थ बेचने में लगे रहते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि समय सीमा पार कर चुके तेल, वसा, मिठाई और पैकेज्ड नमकीन का लंबे समय तक सेवन लिवर और किडनी पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है।
फिजिशियन डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि खराब या रैंसिड तेल में ऑक्सीडेशन की प्रक्रिया तेज हो जाती है, जिससे जहरीले तत्व पैदा होते हैं। जब ये तत्व शरीर में जाते हैं, तो लीवर उन्हें फिल्टर करने का काम करता है। लगातार सेवन से लीवर पर दबाव बढ़ता है, जिससे फैटी लीवर, यकृत संक्रमण, पीलिया और गंभीर मामलों में लीवर फेल्योर जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
इसी तरह किडनी भी इन हानिकारक तत्वों को बाहर निकालने में अक्षम हो जाती है। एक्सपायर्ड तेल और अन्य खराब खाद्य पदार्थ ब्लड प्रेशर बढ़ाने, किडनी के फिल्ट्रेशन रेट को घटाने और यूरिनरी सिस्टम को प्रभावित करने में सक्षम होते हैं। इससे किडनी फेल्योर, यूरिनरी संक्रमण और अन्य गंभीर रोगों का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि सावधानी और जागरूकता ही लिवर और किडनी को गंभीर नुकसान से बचाने का सबसे सुरक्षित तरीका है।