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Gorakhpur News: फर्जी डिग्री बनाने वाले गिरोह पर गैंगस्टर एक्ट का केस दर्ज

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डॉक्टरों के नाम पर फर्जी डिग्रियां तैयार कर बेचते थे आरोपी, गिरोह का सरगना अलाउद्दीन
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गोरखपुर। असली डॉक्टरों के नाम पर फर्जी डिग्रियां तैयार कर बेचने और उन डिग्रियों से वाराणसी, गाजीपुर और प्रयागराज में क्लीनिक व डायग्नोस्टिक सेंटर चलाने वाले गिरोह के पांच बदमाशों पर पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की है। गिरोह का सरगना कुशीनगर जिले के तमकुहीराज थाना क्षेत्र के हरिहरपुर निवासी अलाउद्दीन को बनाया गया है। वहीं, गाजीपुर के पदुमपुर मैगरराय निवासी बृजेश लाल, वाराणसी के सारनाथ क्षेत्र के दीनापुर निवासी ओमप्रकाश गौतम, चौबेपुर के बराई निवासी दीपक विश्वकर्मा और प्रयागराज के जसरा निवासी श्रीराम पांडेय को गुर्गा बनाया गया है।
मामले की शुरुआत गुलरिहा थाना क्षेत्र से हुई, जब डॉ. राहुल नायक ने 17 मई 2024 को पुलिस को तहरीर देकर शिकायत की थी कि उनके नाम से फर्जी डिग्री बनाकर अवैध डायग्नोस्टिक और अल्ट्रासाउंड सेंटर खोला गया है। पुलिस जांच में यह आरोप सही पाया गया। गाजीपुर जिले के जखनियां में डॉ. नायक के नाम से अवैध डायग्नोस्टिक सेंटर संचालित हो रहा था। पुलिस ने सबसे पहले बृजेश लाल को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में उसने कबूल किया कि उसे यह डिग्री वाराणसी सारनाथ निवासी ओमप्रकाश गौतम ने 50 हजार रुपये में बेची थी। इसके बाद पुलिस ने ओमप्रकाश को भी पकड़ा। जांच में पता चला कि ओमप्रकाश ने पटना से डेंटिस्ट का अवैध डिप्लोमा बनवाया था और वाराणसी के जाल्हूपुर इलाके में आदर्श डेंटल एंड आई क्लीनिक के नाम से क्लीनिक चला रहा था। ओमप्रकाश ने पुलिस को बताया कि यह डिग्री उसे वाराणसी चौबेपुर निवासी दीपक विश्वकर्मा ने 35 हजार रुपये में दी थी, जिसे उसने आगे बेचकर मुनाफा कमाया। पुलिस ने दीपक को दबोचा तो उसने बताया कि डिग्रियों का यह धंधा वाराणसी के एक अस्पताल में कार्यरत सुहैल नामक युवक से जुड़ा है, जो फर्जी दस्तावेज उपलब्ध कराता था।
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वर्जन :

पुलिस ने अब इस पूरे नेटवर्क पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई कर दी है। ऐसे लोगों की वजह से न सिर्फ मरीजों की जान जोखिम में पड़ती है बल्कि असली डॉक्टरों की प्रतिष्ठा धूमिल होती है। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों और इनके आर्थिक नेटवर्क की भी जांच कर रही है।
रवि सिंह, सीओ गोरखनाथ
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