गोरखपुर। गंगेश हत्याकांड की कहानी हत्या और खुदकुशी में उलझती जा रही है। एक तरफ गंगेश के शव के पंचनामे में साफ-साफ लिखा है कि मौत के बाद शरीर और नाखून हल्का नीला पड़ गया था।
वहीं दूसरी तरफ लखनऊ से आई स्टेट मेडिकोलीगल सेल की रिपोर्ट कहती है कि ऐसे कोई लक्षण नहीं मिले हैं। इन सवाल-जवाब के बीच एसआईटी की जांच भी अधर में लटक गई है। गंगेश की हत्या हुई या फिर खुदकुशी इसको प्रमाणित करने वाला कोई साक्ष्य टीम के हाथ अभी तक नहीं लग पाया है।
एसआईटी ने गंगेश का मोबाइल फॉरेंसिक लैब जांच के लिए भेजा था, जिसकी जांच पूरी हो गई। टीम का कहना है कि उसमें कुछ ऐसा नहीं मिला है, जिससे घटना का पर्दाफाश किया जा सके। टीम ने गंगेश की पत्नी से दिल्ली कॉल कर संपर्क किया और उन्हें गंगेश का मोबाइल सौंपने के लिए बुलाया है।
लखनऊ के अधिवक्ता ने दिया बयान : शनिवार को लखनऊ के अधिवक्ता ने गोरखपुर आकर इस केस में अपना बयान दर्ज कराया। उन्होंने पुलिस को बताया कि वह पहले योगेश दत्त पांडेय हत्या का केस देख रहे थे। इसके पहले चेक बाउंस का भी एक केस वह योगेश का देख चुके थे। बाद में उन्हें इस केस से हटा दिया गया। इस बीच केस को लेकर परिवार के लोगों से बातचीत हुई थी।
एसआईटी का कहना है कि अधिवक्ता के बयान से कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिल पाए हैं। फिलहाल टीम अभी और भी पहलुओं पर जांच कर रही है।