जिला पंचायत सदस्य सुधा सिंह के आवास पर विधायक के विरोध में जुटे थे ग्रामीण
सुधा सिंह ने विधायक पर सरकारी जमीन व खेतों में हो रहे अवैध खनन को संरक्षण देने का लगाया आरोप
पिपराइच। स्थानीय विधायक व जिला पंचायत सदस्य के बीच सेफ्रान सीटी और उनौला में वर्षों से चल रहा खनन विवाद को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का मामला गरमाता जा रहा है। बुधवार को जिला पंचायत सदस्य सुधा सिंह के आवास पर ग्रामीणों ने विधायक और अवैध खनन करने वालों के विरुद्ध प्रदर्शन किया। इस दौरान जिला पंचायत सदस्य ने विधायक पर खनन माफियाओं को संरक्षण देने समेत कई गंभीर आरोप लगाए। वहीं, विधायक महेंद्र पाल सिंह ने आरोपों को गलत बताया है।
जिला पंचायत सदस्य सुधा सिंह का आरोप है कि विधायक खनन माफियाओं के शरणदाता बन गए हैं। गांव में सरकारी जमीन व खेतों में अवैध खनन का काम किया गया है। जिला पंचायत सदस्य के समर्थक ग्रामीण धनवंत सिंह ने आरोप लगाया कि विधायक के संरक्षण में ही गांव का पूर्व प्रधान धनश्याम सिंह ने छह डिस्मिल जमीन जुलाई में कब्जा कर लिया। सोनमती, उर्मिला, सविता ने गांव निवासी अभिषेक उर्फ मंटू सिंह पर खेत व पट्टे के जमीन से तीन फिट के जगह मनमानी पांच फिट गहरा मिट्टी खनन कराने और बदले में पैसा नहीं देने का आरोप लगाया। सुधा सिंह के बुलावे पर विधायक महेंद्र पाल सिंह के गांव से आई उनकी पटीदार और स्व. केडी सिंह की विधवा पत्नी वासमती देवी ने करोड़ से ऊपर की जमीन पर अवैध कब्जा का आरोप लगाया।उनके गांव के बगल के ठाकुरपुर निवासी पूर्व प्रधान जगदीश पासवान ने भी आरोप लगाया कि उनकी पुश्तैनी जमीन पर विधायक के सहयोग से दबंग अवैध कब्जा कर रहे हैं। शिकायत के बाद भी विधायक न्याय का साथ नहीं दे रहे हैं। आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने प्रदर्शन कर जांच की मांग की है।
वहीं अवैध खनन कराने के आरोपी मंटू सिंह ने कहा कि बिना किसानों के सहमति के खनन नहीं होता है। खनन के एवज में पैसा नहीं देने का आरोप गलत है। 21 डिसमिल जमीन में खनन के लिए पौने दो लाख रुपये देकर पांच फिट खनन किया गया है। बाउंस चेक के बदले खाते में पैसा भेजा है।
कोट
सेफ्रान सीटी मेरे बाग की जमीन में बन रहा है। उनकी शिकायत पर राजस्व टीम ने पैमाइश भी की थी। जांच रिपोर्ट में किसी के जमीन पर कब्जा नहीं पाया गया। विधायक अब 10 लाख रुपये लेकर समझौता करने का दबाव बना रहे हैं।
- सुधा सिंह, जिला पंचायत सदस्य
वर्जन
गांव के वासमती देवी के बेटे ने बैनामा किया। खारिज दाखिल के बाद भी बैनामा लेने वाला वह जमीन वापस करने को तैयार था, लेकिन पैसा वापस नहीं हुआ। जमीन पर अवैध कब्जा रोकने के लिए अधिकारी को पत्र लिखा था। किसी का निजी विरोध नहीं किया गया, फिर क्यों परेशानी हो रही है।
- महेंद्र पाल सिंह, विधायक, पिपराइच