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डीडीयू : वर्षों पहले रिटायर हो गए कर्मचारी और प्रोफेसर...आवास का नहीं जा रहा मोह

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सेवानिवृत्त होने के बाद भी विश्वविद्यालय प्रशासन की सहमति से आवासों में रह रहे
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गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में कुछ कर्मचारी और प्रोफेसर ऐसे हैं, जिनका रिटायरमेंट के बाद भी आवास से मोह खत्म नहीं हो रहा है। वर्षों से अवैध रूप से रह रहे हैं। इससे विश्वविद्यालय को आर्थिक नुकसान भी हाे रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने आवास खाली करना शुरू कराया तो अब नए-नए मामले सामने आ रहे हैं।
विश्वविद्यालय की जांच में दशकों पुराने कब्जे के मामले सामने आ रहे हैं। तत्कालीन जिम्मेदारों की सहमति से आवासों पर कब्जा कर लोग रह रहे हैं। इनमें सभी सुविधाएं मुफ्त हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन खाली कराने को लेकर अभियान चला रहा है। 28 फरवरी को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के 36 आवासों में से 23 आवासों से कब्जा खाली कराकर कमरे सील किए गए थे। इसके बाद 10 मार्च को भी रिटायर हो चुके दो कर्मचारियों को एक हफ्ते में आवास खाली करने की नोटिस दी गई है।
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20 साल पहले हो गया था रिटायर

सूत्रों ने बताया कि एक कर्मचारी वर्ष 2004 में रिटायर हुआ था। उसके बाद 21 साल से मुंशी कॉलोनी में रह रहा है। आवास के साथ ही वह सभी सुविधाओं का भी मुफ्त में उपभोग कर रहा है। एक महिला प्रोफेसर वर्ष 2018 में रिटायर हुईं, लेकिन महारानी लक्ष्मीबाई छात्रावास के एक कमरे में अभी भी रह रही हैं। कुलपति के संज्ञान में मामला आने के बाद इन दोनों को नोटिस दिए जाने की तैयारी चल रही है। होली के बाद नोटिस देने की बात कही जा रही है।
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कोट...
रिटायर होने के बाद भी कुछ लोगों के वर्षों से विश्वविद्यालय के आवास में रहने का मामला आया है। संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट मंगवाई जाएगी। जल्द ही ये आवास खाली कराए जाएंगे।
- प्रो. पूनम टंडन, कुलपति
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