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Gorakhpur News: इंदौर मॉडल अपनाएंगे... गोरक्षनगरी को स्वच्छ बनाएंगे

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नगर निगम की ओर से स्वच्छता पर आयोजित कार्यशाला का दूसरा दिन
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समापन समारोह में आज शामिल होंगे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
गोरखपुर। नगर निगम की ओर से स्वच्छता पर आयोजित कार्यशाला में बुधवार को भी स्वच्छता संबंधी नुस्खे बताए गए। इसमें अधिकारियों ने इंदौर मॉडल को अपनाकर गोरक्षनगरी को स्वच्छ बनाने की बात पर जोर दिया। सेंटर ऑफ साइंस एंड एन्वाॅयर्नमेंट में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट एंड सर्कुलर इकोनॉमी के प्रोजेक्ट डायरेक्टर अतिन बिस्वास ने कहा कि कचरा निस्तारण से पहले कचरे की उठान जरूरी है। घर से कचरा अलग नहीं हुआ तो उसका निस्तारण संभव नहीं है। इसके लिए गाड़ियों का भी बैकअप रखना होगा। अगर कोई गाड़ी खराब हो जाए तो दूसरी वहां पहुंचनी चाहिए। राष्ट्रीय कार्यशाला का समापन बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में होगा।
नगर निगम और डब्ल्यूआरआई इंडिया के सहयोग से आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि इंदौर नगर निगम ने इस क्षेत्र में काफी बेहतर काम किया है। वहां हर तरह के कचरे को घर से ही अलग कर दिया जाता है। इंदौर निगम रोजाना 500 टन कचरे की मदद से 17 टन सीएनजी बनाकर बेच रहा है। इससे उसे अच्छी आय भी हो रही है। गोरखपुर नगर निगम को भी कचरे से आय बनाने के रास्ते तलाशने होंगे। ज्यादा से ज्यादा कलेक्शन करें। यूजर चार्ज वसूलें, प्रोसेसिंग पर ध्यान दें। साथ ही सूखे कचरे को बेचकर भी आय बना सकते हैं।
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नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल ने कहा कि खुले में कचरा जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण को खत्म करने के लिए प्रशासन के साथ जनता का सहयोग चाहिए। बिना जन भागीदारी के हम अपने शहर को खुले में कचरा जलाने से मुक्त नहीं करा पाएंगे। निगम ने गोरखपुर को स्वच्छता में बेहतर बनाया और उसी तरह स्वच्छ वायु के क्षेत्र में हमने कई महत्वपूर्ण उपक्रम लागू किए हैं।
कार्यक्रम में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए विशेषज्ञों ने 2027 तक ''''खुले में कचरा जलाने से मुक्त'''' गोरखपुर की रणनीतिक योजना पर गहन चर्चा की। नगर निगम गोरखपुर के अधिकारियों समेत पार्षदों ने भी इस चर्चा में भाग लिया। कचरा प्रबंधन को मजबूत करने और कचरा जलाने की प्रवृत्ति को खत्म करने में आनेवाली चुनौतियों, उपाय और अवसरों पर विचार-विमर्श किया गया। राष्ट्रीय कार्यशाला का समापन बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में होगा। बाहर से आए विशेषज्ञों में सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वाॅयर्नमेंट (सीएसई) के अतिन विश्वास, पीजीआई चंडीगढ़ से डॉ. रविंद्र खैवाल, पुणे स्थित संस्था स्वच्छ से अमोघ भोंगले, बंगलूरू स्थित हसिरु डाला इनोवेशन से अनिल रामकृष्ण, आईआईटी खड़गपुर से डॉ. ब्रिजेश दुबे, लंग केयर फाउंडेशन से डॉ. राजीव खुराना शामिल हैं। उन्हाेंने नीतियों और दिशा-निर्देशों को तैयार करने, परिचालन प्रक्रियाओं को अनुकूलित करने, बुनियादी ढांचे को बढ़ाने, क्षमता निर्माण, खरीद और अनुबंध प्रथाओं को मजबूत करने और केंद्रित व्यवहार परिवर्तन संचार अभियानों के साथ संभावित समाधानों पर चर्चा की।

शहर में निर्माण के चलते धूल ज्यादा...कचरा अलग करने के लिए करें जागरूक
आईआईटी खड़गपुर में वेस्ट मैनेजमेंट के प्रोफेसर ब्रिजेश दूबे ने मंगलवार को शहर का भ्रमण किया। उन्होंने बताया कि निर्माण कार्यों के चलते यहां काफी ज्यादा धूल है। निर्माण स्थलों पर शोधित पानी का छिड़काव जरूरी है। कचरा जलने से रोकने के लिए सबसे पहले पूरा कचरा उठाना होगा। सुथनी में बन रहे प्लांट्स के सुचारू रूप से संचालन के लिए जरूरी है कि घर से ही कचरा अलग हो कर उठे। इससे जो उत्पाद बनेगा उसकी गुणवत्ता खराब नहीं होगी। कचरा अलग कर देने के लिए लोगों को जागरूक करना पड़ेगा। उन्हें बताना होगा कि ऐसा न करने पर उन्हें कई तरह की बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है।
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सबसे ज्यादा प्लास्टिक कचरा जलता है
कार्यशाला में प्रस्तुत एक रिपोर्ट के अनुसार शहर में सबसे अधिक प्लास्टिक कचरा जलाया जाता है। सर्दियों में यह 32 प्रतिशत और गर्मी में 30 प्रतिशत है। इसके बाद कागज और लकड़ी की मात्रा है। गर्मी में कपड़ा आठ प्रतिशत, एल्युमिनियम फॉइल 12 प्रतिशत जलाया जाता है।
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