लाइन मैन कम होने से फॉल्ट बनाने में हो रही देरी
गोरखपुर। बिजली निगम की कमियों का खामियाजा सीधे तौर पर उपभोक्ताओं को ही उठाना पड़ रहा है। उपभोक्ताओं की छोटी से छोटी शिकायत को दूर करने में घंटों का समय लगता है। निगम में लाइनमैन की कमी की वजह से उपभोक्ताओं की फाल्ट से संबंधित शिकायतें दूर करने में घंटो की देरी होती है।
शहर के एक उपकेंद्र पर महज 18 लाइनमैन हैं, जिनकी आठ-आठ घंटों की तीन शिफ्ट में ड्यूटी लगाई जाती है। यानी एक शिफ्ट में उपकेंद्र पर केवल छह लाइनमैन मौजूद रहते हैं। ऐसे में 12 से 15 हजार उपभोक्ताओं की जिम्मेदारी 6 लाइनमैन उठाते हैं। सार्वजनिक फॉल्ट के साथ उपभोक्ताओं की शिकायतों को दूर करने में काफी समय लगता है लेकिन बिजली निगम उपभोक्ताओं की समस्याओं को लेकर उदासीन है। वहीं अभियंता, निगम की कमियों को लेकर उपभोक्ता को ही जिम्मेदार ठहराते हैं।
विद्युत मजदूर संविदा संगठन के अध्यक्ष अजय शाही ने बताया कि बिजली निगम के पास नियमित लाइनमैन 100 से भी कम हैं। निगम संविदा लाइनमैन के भरोसे चल रहा है। बिजली निगम के पास करीब 550 लाइन मैन हैं, जिनमे से 450 से अधिक संविदा लाइन मैन हैं। शहर में रोजाना करीब 200 से ज्यादा सार्वजनिक व उपभोक्ताओं के फॉल्ट की शिकायतें आती हैं। यही वजह है कि उपभोक्ताओं की समस्या के निस्तारण में घंटों का समय लगता है।