जेल बाईपास रोड, खोराबार, पादरी बाजार इलाकों में कई दुकानें खुली रहीं
गोरखपुर। आदेश के बावजूद रविवार को शहर में मुर्गे की कई दुकानें खुली रहीं। कुछ दुकानों पर मुर्गे को छिपाकर बेचा जा रहा था। निगम की टीम ने विभिन्न इलाकों में छापा मारकर 50 से ज्यादा मुर्गों को जब्त किया। इसके बाद उन्हें मारकर जमीन के अंदर दफन करा दिया। उधर, बकरे की दुकान पर भी चुपके से मुर्गे का मीट बेचा जा रहा था।
नगर निगम की टीम ने दुकानदारों को चेतावनी दी कि फिर से मुर्गा रखा हुआ मिलता है तो संक्रामक रोग फैलाने के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी। रविवार को नगर निगम के मुख्य पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी डाॅ. रोबिन चंद्रा के नेतृत्व में नगर निगम की टीम करीमनगर पहुंची। यहां एक जाली में 32 मुर्गों को छुपा कर रखा था। टीम ने सभी 32 मुर्गों को जब्त करने के बाद मार दिया। इसके बाद गड्ढा खोदवा कर उन्हें मिट्टी के अंदर दफना दिया। गिरिधरगंज में जांच के दौरान मुमताज नामक दुकानदार के पास से नौ मुर्गा, रानीडीहा इलाके में रहमान नामक दुकानदार के पास से 16 मुर्गा जब्त किया गया और उसका निस्तारण कराया गया। डाॅ. रोबिन चंद्रा ने बताया कि इन सभी दुकानदारों के मुर्गों को नगर निगम की टीम व प्रवर्तन दल की ओर से प्रोटोकाल के तहत निस्तारण करा दिया गया।
वहीं, जेल बाईपास रोड की तरफ बकरा काटने वाली कई दुकानों पर चुपके से मुर्गे का मीट बेचा जा रहा था। दुकानदारों ने मुर्गे छिपाकर रखे थे। कुछ तो ऑर्डर मिलने पर दूसरे जगह से कटवा कर दे रहे थे ताकि टीम उसे पकड़ न पाए।
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मछली की दुकानों पर बढ़ी बिक्री
शहर में बर्ड फ्लू के मामले आने के बाद भी रविवार को मांस-मछली की मांग में कमी नहीं आई। फर्क बस यह था कि मुर्गे की दुकानें बंद रहने की वजह से मछली की दुकानों पर बिक्री बढ़ गई। बकरे के मीट की मांग भी अधिक रही। बकरे के मीट की कीमतों में भी 20 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई। मछली विक्रेता दिनेश निषाद ने बताया कि रविवार को अन्य दिनों की तुलना में मांग ज्यादा रही। मुर्गा न मिलने की वजह से लोगों ने मछली की ओर रुख किया। रोज आठ बजे तक दुकान बंद करते थे। लेकिन, मांग अधिक होने की वजह से सात बजे ही सारा माल बिक गया। अब अगले दिन के लिए अधिक स्टॉक रखना पड़ेगा।